📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने नृभया मैपिंग के 10 साल बाद दिल्ली में महिला सुरक्षा का ऑडिट मांगा
✍️ India Today
🗓 29 सित. 2026, 04:31 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में महिला सुरक्षा उपायों का व्यापक ऑडिट करने का आदेश दिया, नृभया मामले के मैपिंग को दस साल पूरा होते हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा बुनियादी ढाँचा और नीतियों का विस्तृत ऑडिट करने का आदेश दिया। यह आदेश नृभया मामले के बाद किए गए सुरक्षा मानचित्रण को पूरा करने के दस साल बाद आया है।
कोर्ट ने कहा कि ऑडिट में मौजूदा योजनाओं का कार्यान्वयन, पुलिस की प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता और सार्वजनिक स्थानों की डिज़ाइन का मूल्यांकन शामिल होना चाहिए, ताकि उत्पीड़न और हिंसा को रोका जा सके। संबंधित प्राधिकरणों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।
दिल्ली के अधिकारियों को ऑडिट टीम के साथ पूरी तरह सहयोग करने और अपराध आँकड़े, निगरानी कवरेज तथा नृभया मानचित्रण के बाद शुरू किए गए महिला‑हितैषी पहल की स्थिति संबंधी डेटा प्रदान करने का कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी लगातार चिंताओं को उजागर करता है और यदि प्रणालीगत खामियाँ पाई गईं तो नीतियों में बदलाव की संभावना बढ़ा देगा।
यह ऑडिट भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए विधायी और प्रशासनिक कदमों को दिशा देने की उम्मीद है।
कोर्ट ने कहा कि ऑडिट में मौजूदा योजनाओं का कार्यान्वयन, पुलिस की प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता और सार्वजनिक स्थानों की डिज़ाइन का मूल्यांकन शामिल होना चाहिए, ताकि उत्पीड़न और हिंसा को रोका जा सके। संबंधित प्राधिकरणों को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।
दिल्ली के अधिकारियों को ऑडिट टीम के साथ पूरी तरह सहयोग करने और अपराध आँकड़े, निगरानी कवरेज तथा नृभया मानचित्रण के बाद शुरू किए गए महिला‑हितैषी पहल की स्थिति संबंधी डेटा प्रदान करने का कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी लगातार चिंताओं को उजागर करता है और यदि प्रणालीगत खामियाँ पाई गईं तो नीतियों में बदलाव की संभावना बढ़ा देगा।
यह ऑडिट भविष्य में महिलाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए विधायी और प्रशासनिक कदमों को दिशा देने की उम्मीद है।