📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arjunaraoc
स्वास्थ्य
सुप्रीम कोर्ट ने एपी हाई कोर्ट को एंटी‑मलेरिया दवा से 7‑साल के बच्चे की मौत की जांच पर निगरानी का आदेश दिया
✍️ The Indian Express
🗓 06 अक्टू. 2026, 04:31 AM
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एंटी‑मलेरिया दवा लेने के बाद एपी में सात साल के बच्चे की मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर कड़ी निगरानी के लिए हाई कोर्ट को निर्देश दिया।
एंटी‑मलेरिया दवा लेने के बाद आंध्र प्रदेश में सात साल के बच्चे की मौत हो गई, जिससे चिकित्सा प्रथा और दवा सुरक्षा पर सवाल उठे।
इस घटना के बाद भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पारदर्शी और समयबद्ध जांच की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या चिकित्सकीय लापरवाही या प्रक्रिया में खामियां थीं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग को हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी टीम के साथ पूरी तरह सहयोग करने को कहा गया है, जिसमें सभी चिकित्सा रिकॉर्ड, दवा की खरीद‑बिक्री की जानकारी और इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान शामिल हैं। यह कदम भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
जांच में एंटी‑मलेरिया दवा की आपूर्ति श्रृंखला, उसकी खुराक के निर्देश और वितरण चैनलों की भी समीक्षा होगी, ताकि राष्ट्रीय दवा सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पुष्टि की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है और भारत में दवा प्रशासन की कड़ी निगरानी की आवश्यकता को दोहराता है।
इस घटना के बाद भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट को जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पारदर्शी और समयबद्ध जांच की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या चिकित्सकीय लापरवाही या प्रक्रिया में खामियां थीं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग को हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी टीम के साथ पूरी तरह सहयोग करने को कहा गया है, जिसमें सभी चिकित्सा रिकॉर्ड, दवा की खरीद‑बिक्री की जानकारी और इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान शामिल हैं। यह कदम भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है।
जांच में एंटी‑मलेरिया दवा की आपूर्ति श्रृंखला, उसकी खुराक के निर्देश और वितरण चैनलों की भी समीक्षा होगी, ताकि राष्ट्रीय दवा सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पुष्टि की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है और भारत में दवा प्रशासन की कड़ी निगरानी की आवश्यकता को दोहराता है।