📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Batthini Vinay Kumar Goud
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा के बीआरएस विधायक की अयोग्यता की पुष्टि की
✍️ Hindustan Times
🗓 25 सित. 2026, 10:02 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा के बीआरएस विधायक की अयोग्यता को बरकरार रखा, निचली अदालत के फैसले को मान्य किया और विरोधी-भ्रष्टाचार नियमों को सुदृढ़ किया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के एक विधायक की तेलंगाना विधानसभा से अयोग्यता वैध है। यह निर्णय तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखता है, जिसने एक याचिका के बाद विधायक को हटाया था जिसमें कहा गया था कि उन्होंने विरोधी‑भ्रष्टाचार कानून का उल्लंघन किया है।
विरोधी दलों द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि 2024 के राज्य चुनावों के बाद वह अपने दल से हटकर किसी अन्य पार्टी में शामिल हो गए, जिससे संविधान के दसवें अनुसूची के तहत अयोग्यता लागू होती है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता की प्रक्रिया सही थी और विधानसभा के निर्णय को उलटा नहीं जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला अयोग्यता नियमों के कड़ाई से पालन को सुदृढ़ करता है और सांसदों को दल बदलने के परिणामों के बारे में स्पष्ट चेतावनी देता है। बीआरएस ने अभी तक कोई तत्काल कानूनी चुनौती नहीं जताई है, पर भविष्य में विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।
यह निर्णय तेलंगाना विधानसभा की संरचना पर असर डाल सकता है, जहाँ बीआरएस बहुमत में है, और आगामी चुनावी दौर में राजनीतिक गठजोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।
विरोधी दलों द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि 2024 के राज्य चुनावों के बाद वह अपने दल से हटकर किसी अन्य पार्टी में शामिल हो गए, जिससे संविधान के दसवें अनुसूची के तहत अयोग्यता लागू होती है। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोग्यता की प्रक्रिया सही थी और विधानसभा के निर्णय को उलटा नहीं जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह फैसला अयोग्यता नियमों के कड़ाई से पालन को सुदृढ़ करता है और सांसदों को दल बदलने के परिणामों के बारे में स्पष्ट चेतावनी देता है। बीआरएस ने अभी तक कोई तत्काल कानूनी चुनौती नहीं जताई है, पर भविष्य में विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।
यह निर्णय तेलंगाना विधानसभा की संरचना पर असर डाल सकता है, जहाँ बीआरएस बहुमत में है, और आगामी चुनावी दौर में राजनीतिक गठजोड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।