📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Biswarup Ganguly
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देश
चंडीगढ़ की सुखना झील को मिला अंतरराष्ट्रीय रैमसर दर्जा, भारत के साइटों की संख्या 103
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 15 अक्टू. 2026, 11:01 PM
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चंडीगढ़ की सुखना झील को रैमसर साइट का दर्जा मिला, जिससे भारत के कुल रैमसर स्थल 103 हो गए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस उपलब्धि पर बधाई दी।
केंद्रीय सरकार ने घोषणा की कि चंडीगढ़ की सुखना झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व की रैमसर जलस्थली सूची में शामिल किया गया है। यह निर्णय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने किया और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इस सम्मान पर क्षेत्र को बधाई दी।
रैमसर दर्जा झील की पारिस्थितिक महत्ता को मान्यता देता है, विशेषकर प्रवासी पक्षियों के आवास और क्षेत्रीय जैव विविधता में इसके योगदान को। इस जोड़ से भारत के रैमसर साइटों की कुल संख्या 103 हो गई, जो जलस्थली संरक्षण के प्रति देश की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अधिकारी बताते हैं कि यह मान्यता संरक्षण प्रयासों को सुदृढ़ करेगी, शोध पहलों को आकर्षित करेगी और क्षेत्र में इको‑टूरिज़्म को बढ़ावा देगी। मंत्री ने कहा कि ऐसे पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना भारत के व्यापक पर्यावरणीय लक्ष्यों और रैमसर संधि के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप है।
स्थानीय प्रशासन जल की गुणवत्ता बनाए रखने और झील की वनस्पति‑प्राणियों की सुरक्षा के लिए निगरानी व प्रबंधन उपायों को मजबूत करने की योजना बना रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मान्यता का वास्तविक लाभ जमीन पर भी दिखे।
रैमसर दर्जा झील की पारिस्थितिक महत्ता को मान्यता देता है, विशेषकर प्रवासी पक्षियों के आवास और क्षेत्रीय जैव विविधता में इसके योगदान को। इस जोड़ से भारत के रैमसर साइटों की कुल संख्या 103 हो गई, जो जलस्थली संरक्षण के प्रति देश की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अधिकारी बताते हैं कि यह मान्यता संरक्षण प्रयासों को सुदृढ़ करेगी, शोध पहलों को आकर्षित करेगी और क्षेत्र में इको‑टूरिज़्म को बढ़ावा देगी। मंत्री ने कहा कि ऐसे पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना भारत के व्यापक पर्यावरणीय लक्ष्यों और रैमसर संधि के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप है।
स्थानीय प्रशासन जल की गुणवत्ता बनाए रखने और झील की वनस्पति‑प्राणियों की सुरक्षा के लिए निगरानी व प्रबंधन उपायों को मजबूत करने की योजना बना रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मान्यता का वास्तविक लाभ जमीन पर भी दिखे।