📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suman85
मौसम
अध्ययन में खुलासा: मेघालय के सबसे गीले क्षेत्र में मानसून की वर्षा में अनियमितता, केवल सूखना नहीं
✍️ Hub News
🗓 17 सित. 2026, 04:45 AM
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एक नवीन अध्ययन से पता चलता है कि मेघालय के सबसे गीले क्षेत्र में अब वर्षा में अनियमितता बढ़ रही है, केवल सूखना नहीं।
मेघालय के प्रसिद्ध सबसे गीले क्षेत्र में वर्षा पैटर्न के एक वैज्ञानिक अध्ययन ने यह दिखाया है कि अब केवल निरंतर कमी नहीं, बल्कि मानसून की वर्षा में अनियमितता बढ़ रही है। लंबे समय के मौसम विज्ञान डेटा की जांच से पता चला कि कुल नमी में स्पष्ट गिरावट नहीं दिखी, पर वर्षा की तीव्रता और समय दोनों में अस्थिरता बढ़ी है।
चेरापुंजी और मावसिनराम जैसे क्षेत्रों को अक्सर अत्यधिक वर्षा के लिए जाना जाता है, पर अब एक ही मानसून में तीव्र बारिश के बाद अचानक सूखे की अवधि देखी जा रही है। यह परिवर्तन इस धारणा को चुनौती देता है कि क्षेत्र केवल सूख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की अनियमितता कृषि, जल प्रबंधन और उन समुदायों की आजीविका को प्रभावित कर सकती है जो स्थिर मानसून पर निर्भर हैं। वे बेहतर निगरानी और अनुकूलन उपायों की सलाह देते हैं ताकि पारिस्थितिक तंत्र और स्थानीय जीवन पर संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।
यह अध्ययन भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून की जटिलता बढ़ने के व्यापक अनुसंधान में एक नया आयाम जोड़ता है, जिससे क्षेत्र‑विशिष्ट जलवायु अनुकूलन नीतियों की आवश्यकता पर बल मिलता है।
चेरापुंजी और मावसिनराम जैसे क्षेत्रों को अक्सर अत्यधिक वर्षा के लिए जाना जाता है, पर अब एक ही मानसून में तीव्र बारिश के बाद अचानक सूखे की अवधि देखी जा रही है। यह परिवर्तन इस धारणा को चुनौती देता है कि क्षेत्र केवल सूख रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की अनियमितता कृषि, जल प्रबंधन और उन समुदायों की आजीविका को प्रभावित कर सकती है जो स्थिर मानसून पर निर्भर हैं। वे बेहतर निगरानी और अनुकूलन उपायों की सलाह देते हैं ताकि पारिस्थितिक तंत्र और स्थानीय जीवन पर संभावित प्रभाव को कम किया जा सके।
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