📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
राजनीति
सिब्लैक नेता ने मोदी से नेपाल बाढ़ के बाद सिक्किम के जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाने को कहा
✍️ India Today NE
🗓 27 अग. 2026, 12:36 AM
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सिब्लैक के एक नेता ने नेपाल में हालिया बाढ़ के बाद सिक्किम में नए जलविद्युत परियोजनाओं को रोकने और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है।
सिब्लैक, जो सतत विकास पर काम करने वाला एक नागरिक मंच है, ने हिमालयी राज्य सिक्किम में नए जलविद्युत परियोजनाओं की मंजूरी को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक अनुरोध किया है। यह मांग नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद की गई है, जिसने बड़ी संख्या में जानें लीं और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।
सिब्लैक के प्रतिनिधि ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बिना नियंत्रण के जलविद्युत विकास से नदी प्रवाह में परिवर्तन हो सकता है और इससे बाढ़ के जोखिम में वृद्धि हो सकती है, विशेषकर सीमा पार नदियों के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए। उन्होंने मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पर्यावरण समूहों के बीच इस बात की चिंता बढ़ रही है कि कई बांधों का संचयी प्रभाव नीचे की ओर जल प्रवाह और आपदा संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने अभी तक इस अपील पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर आगामी परियोजना मंजूरी से पहले इन मुद्दों की समीक्षा की संभावना है।
नेपाल की बाढ़ ने क्षेत्रीय जल प्रबंधन पर पुनर्विचार को प्रेरित किया है, जिससे पड़ोसी राज्यों को ऐसे बुनियादी ढाँचे की योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता महसूस हो रही है, जो सीमा पार जल गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।
सिब्लैक के प्रतिनिधि ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बिना नियंत्रण के जलविद्युत विकास से नदी प्रवाह में परिवर्तन हो सकता है और इससे बाढ़ के जोखिम में वृद्धि हो सकती है, विशेषकर सीमा पार नदियों के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को देखते हुए। उन्होंने मौजूदा और प्रस्तावित परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और सुरक्षा मानकों की स्वतंत्र जांच की मांग की।
पर्यावरण समूहों के बीच इस बात की चिंता बढ़ रही है कि कई बांधों का संचयी प्रभाव नीचे की ओर जल प्रवाह और आपदा संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने अभी तक इस अपील पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर आगामी परियोजना मंजूरी से पहले इन मुद्दों की समीक्षा की संभावना है।
नेपाल की बाढ़ ने क्षेत्रीय जल प्रबंधन पर पुनर्विचार को प्रेरित किया है, जिससे पड़ोसी राज्यों को ऐसे बुनियादी ढाँचे की योजनाओं का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता महसूस हो रही है, जो सीमा पार जल गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं।