📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Caddy, Alexander E., 1895
बिज़नेस
सासाराम के दुकानदारों ने यूपीआई शुल्क बढ़ने पर ‘केवल नकद’ बोर्ड लगाए
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 18 सित. 2026, 08:45 PM
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बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में व्यापारियों ने यूपीआई नियमों में बदलाव और संभावित एमडीआर शुल्क के विरोध में ‘नो यूपीआई, केवल नकद’ के बोर्ड लगाए हैं।
सासाराम के कई दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों के बाहर ‘नो यूपीआई, केवल नकद’ के बोर्ड लगाना शुरू कर दिया है। यह कदम भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यूपीआई नियमों में बदलाव और संभावित एमडीआर शुल्क के प्रस्ताव के विरोध में उठाया गया है।
व्यापारी इस बात से चिंतित हैं कि नया एमडीआर शुल्क उनके कम मार्जिन वाले व्यापार को प्रभावित करेगा, खासकर उन छोटे लेन‑देन में जहाँ डिजिटल भुगतान पर बहुत निर्भरता है। उनका मानना है कि अतिरिक्त लागत अंततः ग्राहकों पर बोझ बन जाएगी, जिससे नकद लेन‑देन में वापसी होगी।
अब तक यह विरोध शांतिपूर्ण रहा है, और दुकानदार ग्राहकों से नकद भुगतान करने का आग्रह कर रहे हैं, जबकि वे अधिकारियों से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। राज्य वाणिज्य विभाग से बैठक का अनुरोध किया गया है, पर अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की असंतुष्टि देखी गई है, जो डिजिटल भुगतान सुधारों के छोटे व्यापारियों पर संभावित आर्थिक प्रभाव को उजागर करती है।
स्थिति अभी भी बदलती हुई है, और इस मुद्दे का समाधान बिहार और देश भर में यूपीआई ढाँचे के कार्यान्वयन की गति को निर्धारित कर सकता है।
व्यापारी इस बात से चिंतित हैं कि नया एमडीआर शुल्क उनके कम मार्जिन वाले व्यापार को प्रभावित करेगा, खासकर उन छोटे लेन‑देन में जहाँ डिजिटल भुगतान पर बहुत निर्भरता है। उनका मानना है कि अतिरिक्त लागत अंततः ग्राहकों पर बोझ बन जाएगी, जिससे नकद लेन‑देन में वापसी होगी।
अब तक यह विरोध शांतिपूर्ण रहा है, और दुकानदार ग्राहकों से नकद भुगतान करने का आग्रह कर रहे हैं, जबकि वे अधिकारियों से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। राज्य वाणिज्य विभाग से बैठक का अनुरोध किया गया है, पर अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की असंतुष्टि देखी गई है, जो डिजिटल भुगतान सुधारों के छोटे व्यापारियों पर संभावित आर्थिक प्रभाव को उजागर करती है।
स्थिति अभी भी बदलती हुई है, और इस मुद्दे का समाधान बिहार और देश भर में यूपीआई ढाँचे के कार्यान्वयन की गति को निर्धारित कर सकता है।