📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / X|Media|Lab (Flickr profile)
मनोरंजन
शेखर कपूर की ‘मासूम’ 1983 में खाली थिएटर में प्रीमियर, बाद में क्लासिक बन गई
✍️ The Times of India
🗓 23 अग. 2026, 07:51 AM
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शेखर कपूर की 1983 की फिल्म ‘मासूम’ का प्रीमियर खाली थिएटर में हुआ, पर बाद में इसे समीक्षकों की सराहना और दर्शकों का प्यार मिला।
1983 में शेखर कपूर ने अपनी निर्देशक यात्रा की शुरुआत ‘मासूम’ नामक ड्रामा फिल्म से की। मुंबई के एक सिनेमा हॉल में इसका प्रीमियर हुआ, लेकिन उस रात हॉल में दर्शकों की कमी स्पष्ट थी।
हालाँकि शुरुआती प्रतिक्रिया ठंडी थी, लेकिन फिल्म की कहानी और अभिनय की सराहना करने वाले दर्शकों ने धीरे‑धीरे इसे समर्थन देना शुरू किया। समीक्षकों ने जुगल हंसराज के बाल अभिनय और अनुभवी कलाकारों के प्रदर्शन को सराहा, साथ ही कपूर की संवेदनशील निर्देशन शैली को भी प्रशंसा मिली। बॉक्स‑ऑफ़िस में भी फिल्म ने धीरे‑धीरे बढ़त बनाई और कई पुरस्कार जीते।
‘मासूम’ को अब भारतीय सिनेमा का एक महत्वपूर्ण कृति माना जाता है, जिसे परिवारिक संबंधों की वास्तविकता और भावनात्मक गहराई के लिए याद किया जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे उस दशक की प्रभावशाली फिल्मों में शामिल किया, जिससे इसका क्लासिक दर्जा और भी पक्का हो गया।
हालाँकि शुरुआती प्रतिक्रिया ठंडी थी, लेकिन फिल्म की कहानी और अभिनय की सराहना करने वाले दर्शकों ने धीरे‑धीरे इसे समर्थन देना शुरू किया। समीक्षकों ने जुगल हंसराज के बाल अभिनय और अनुभवी कलाकारों के प्रदर्शन को सराहा, साथ ही कपूर की संवेदनशील निर्देशन शैली को भी प्रशंसा मिली। बॉक्स‑ऑफ़िस में भी फिल्म ने धीरे‑धीरे बढ़त बनाई और कई पुरस्कार जीते।
‘मासूम’ को अब भारतीय सिनेमा का एक महत्वपूर्ण कृति माना जाता है, जिसे परिवारिक संबंधों की वास्तविकता और भावनात्मक गहराई के लिए याद किया जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे उस दशक की प्रभावशाली फिल्मों में शामिल किया, जिससे इसका क्लासिक दर्जा और भी पक्का हो गया।