🔥 TRENDING Supreme Court Ruling Could Boost Himac... Uttarakhand High Court Halts Blacklist... Godiyal dons black armbands to protest... Amit Shah Sets 65‑Seat Target for BJP... Delhi Metro Adjusts Diwali Timings: Ea... GRAP-3 Pollution Controls Enforced Acr...
07 Nov 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
शहडोल में फूटा रसोइया और स्व-सहायता समूह की महिलाओं

शहडोल में फूटा रसोइया और स्व-सहायता समूह की महिलाओं

✍️ Reporter: Manjur Mansoori Saif Khan 🗓 21 Sep 2026, 07:02 PM 👁 173
Watch on: ▶️ YouTube
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post
शहडोल में फूटा रसोइया और स्व-सहायता समूह की महिलाओं का गुस्सा: कलेक्टर और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, उग्र आंदोलन की चेतावनी!
बड़ी ख़बर | बुढ़ार (शहडोल):
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत शासकीय स्कूलों में नौनिहालों का पेट भरने वाली महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। बुढ़ार क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने लामबंद होकर अपनी लंबित मांगों और विभागीय अनदेखी के खिलाफ हुंकार भरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिलाओं ने मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन और जिला कलेक्टर शहडोल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द समस्याओं के निराकरण की मांग की है।
क्या हैं मुख्य मुद्दे? क्यों भड़का असंतोष?
3 साल से 15-15 दिनों के मानदेय की डकैती!
वर्ष 2024, 2025 और 2026 में जून माह के 15 दिनों का मानदेय प्रदेश की लगभग 2.32 लाख रसोइया बहनों को नहीं दिया गया है। महिलाओं का आरोप है कि पहले यह राशि नियमित मिलती थी, लेकिन पिछले तीन सालों से इसका भुगतान रोक दिया गया है। ज्ञापन में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लंबित मानदेय तत्काल जारी करने की मांग की गई है।
एकमुश्त बजट न मिलने से बढ़ा आर्थिक संकट!
पूर्व में पंचायतीराज संचालनालय द्वारा पूरे प्रदेश में एक साथ बजट जारी किया जाता था। वर्तमान व्यवस्था में जिला स्तर से अलग-अलग तारीखों पर राशि जारी होने के कारण समूहों को भारी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। मांग की गई है कि प्रदेश भर में एक निश्चित तिथि पर एकमुश्त राशि और खाद्यान्न जारी किया जाए।
सोसायटी वालों की मनमानी और बहानेबाज़ी पर लगे लगाम!
सोसायटियों (पीडीएस) में खाद्यान्न उपलब्ध होने के बावजूद स्व-सहायता समूहों को समय पर राशन नहीं दिया जाता और तरह-तरह के बहाने बनाए जाते हैं, जिससे बच्चों के मध्याह्न भोजन पर संकट मंडराने लगता है।
"जर्जर शेड, कम मजदूरी और महंगाई... आखिर कब तक सहे अत्याचार?"
ज्ञापन सौंपने पहुंची बहनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में भी उन्हें बेहद कम मजदूरी मिल रही है। इतना ही नहीं, स्कूलों में जर्जर हो चुके किचन शेड,कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के बावजूद वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से बच्चों को खाना खिला रही हैं।
सीधा अल्टीमेटम:
महिलाओं ने साफ़ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया और बकाया राशि व खाद्यान्न जारी नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
📲Get App