📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kuldeepburjbhalaike
धर्म
पंजाब बंद के दौरान जालंधर में शब्द कीर्तन, सिख संगठनों ने किया विरोध
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 21 अग. 2026, 03:38 PM
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पंजाब बंद के दौरान जालंधर के गुरु नानक मिशन चौक पर शब्द कीर्तन हुआ, जिससे सिख संगठनों ने लोगों को घर में रहने की सलाह दी।
पंजाब में हाल ही में घोषित बंद के दौरान जालंधर के गुरु नानक मिशन चौक के आसपास शब्द कीर्तन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में श्लोक और भजन का समूहिक गायन हुआ, जिससे कई श्रद्धालु इस मुख्य चौक पर इकट्ठा हुए।
सिख संगठनों ने कहा कि बंद का उद्देश्य नागरिकों को घर में रखना है और इस दौरान सड़कों पर न निकलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शब्द कीर्तन में भाग लेने वाले लोगों ने इस निर्देश को नजरअंदाज़ किया।
कीर्तन के आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम धार्मिक अभिव्यक्ति के रूप में आयोजित किया गया था, न कि राजनीतिक विरोध के रूप में। उन्होंने आलोचना को स्वीकार किया और भविष्य में बंद के समय के साथ तालमेल बिठाते हुए कार्यक्रम आयोजित करने का वचन दिया।
स्थानीय पुलिस ने कहा कि इस दौरान कोई बड़ी बाधा नहीं आई, परंतु भीड़ के कारण कुछ समय के लिए ट्रैफ़िक में व्यवधान हुआ। व्यवस्था बनाए रखने के लिये अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि धार्मिक सभाओं और राजनीतिक बंद दोनों के एक साथ होने पर सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, और ऐसी स्थितियों में समुदाय के नेताओं और नागरिकों के बीच स्पष्ट संवाद की आवश्यकता है।
सिख संगठनों ने कहा कि बंद का उद्देश्य नागरिकों को घर में रखना है और इस दौरान सड़कों पर न निकलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शब्द कीर्तन में भाग लेने वाले लोगों ने इस निर्देश को नजरअंदाज़ किया।
कीर्तन के आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम धार्मिक अभिव्यक्ति के रूप में आयोजित किया गया था, न कि राजनीतिक विरोध के रूप में। उन्होंने आलोचना को स्वीकार किया और भविष्य में बंद के समय के साथ तालमेल बिठाते हुए कार्यक्रम आयोजित करने का वचन दिया।
स्थानीय पुलिस ने कहा कि इस दौरान कोई बड़ी बाधा नहीं आई, परंतु भीड़ के कारण कुछ समय के लिए ट्रैफ़िक में व्यवधान हुआ। व्यवस्था बनाए रखने के लिये अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि धार्मिक सभाओं और राजनीतिक बंद दोनों के एक साथ होने पर सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, और ऐसी स्थितियों में समुदाय के नेताओं और नागरिकों के बीच स्पष्ट संवाद की आवश्यकता है।