📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dr.ratnesh trivedi
स्वास्थ्य
वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रत्नेश चौधरी ने एशिया‑पैसिफिक कांफ्रेंस में फिजियोथेरेपी को चिकित्सा प्रणाली के रूप में मान्यता की मांग की
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 27 सित. 2026, 01:01 PM
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विश्व फिजियोथेरेपी एशिया‑पैसिफिक कांफ्रेंस में पटना में आईजीआईएमएस के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रत्नेश ने फिजियोथेरेपी को एक स्वतंत्र चिकित्सा प्रणाली के रूप में मान्यता देने की मांग की।
पटना, बिहार – विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस के एशिया‑पैसिफिक सत्र में आईजीआईएमएस के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रत्नेश चौधरी ने फिजियोथेरेपी को एक स्वतंत्र चिकित्सा प्रणाली के रूप में मान्यता देने की औपचारिक मांग रखी। उन्होंने निवारक देखभाल, पुनर्वास और दीर्घकालिक रोग प्रबंधन में फिजियोथेरेपी के वैज्ञानिक प्रमाणों को उजागर किया और कहा कि आधिकारिक मान्यता से पेशेवर मानक और रोगियों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।
डॉ. चौधरी ने यह अपील राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामकों और स्वास्थ्य मंत्रालय को संबोधित की, यह तर्क देते हुए कि ऐसी मान्यता से पाठ्यक्रम का मानकीकरण, नियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में फिजियोथेरेपी सेवाओं का बेहतर एकीकरण संभव होगा।
सम्मेलन के आयोजकों ने इस मांग के महत्व को स्वीकार किया और बताया कि इस प्रस्ताव को आगे की नीति‑निर्माण प्रक्रियाओं के लिए संबंधित निकायों को भेजा जाएगा। अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है, पर यह कदम भारत में फिजियोथेरेपी पेशेवरों के व्यापक मान्यता के प्रयास को दर्शाता है।
डॉ. चौधरी ने यह अपील राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियामकों और स्वास्थ्य मंत्रालय को संबोधित की, यह तर्क देते हुए कि ऐसी मान्यता से पाठ्यक्रम का मानकीकरण, नियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में फिजियोथेरेपी सेवाओं का बेहतर एकीकरण संभव होगा।
सम्मेलन के आयोजकों ने इस मांग के महत्व को स्वीकार किया और बताया कि इस प्रस्ताव को आगे की नीति‑निर्माण प्रक्रियाओं के लिए संबंधित निकायों को भेजा जाएगा। अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है, पर यह कदम भारत में फिजियोथेरेपी पेशेवरों के व्यापक मान्यता के प्रयास को दर्शाता है।