📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Brajesh Ohdar
बिज़नेस
SEBI ने FPIs को अधिक कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भाग लेने की अनुमति दी, T+3 सुरक्षा के साथ
✍️ Asianet Newsable
🗓 25 सित. 2026, 03:16 AM
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सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को अधिक कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने की अनुमति दी, साथ में T+3 सेटलमेंट सुरक्षा लागू की।
सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) ने घोषणा की है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) अब अधिक कमोडिटी डेरिवेटिव अनुबंधों में भाग ले सकेंगे। यह कदम बाजार में भागीदारी को गहरा करने और भारत के कमोडिटी बाजार को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
इन अतिरिक्त अनुबंधों के लिए जोखिम को कम करने हेतु SEBI ने T+3 (ट्रेड प्लस तीन दिन) सेटलमेंट सुरक्षा लागू की है। इस व्यवस्था के तहत ट्रेड के बाद तीन कार्यदिवसों के भीतर सिक्योरिटीज़ और फंड का हस्तांतरण पूरा होना अनिवार्य है, जिससे बाजार सहभागियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तारित पहुँच से विदेशी पूँजी भारत के कमोडिटी सेक्टर में अधिक आकर्षित होगी, जिससे तरलता और मूल्य निर्धारण में सुधार हो सकता है। SEBI ने बताया है कि नई व्यवस्था शीघ्र ही लागू होगी, बशर्ते बाजार मध्यस्थों द्वारा आवश्यक अनुपालन हो।
यह निर्णय SEBI की व्यापक रणनीति को दर्शाता है, जिसमें बाजार पहुँच को उदार बनाते हुए जोखिम नियंत्रण को सुदृढ़ किया जा रहा है, और यह भारत के कमोडिटी बाजार की स्थिरता में विश्वास को संकेतित करता है।
इन अतिरिक्त अनुबंधों के लिए जोखिम को कम करने हेतु SEBI ने T+3 (ट्रेड प्लस तीन दिन) सेटलमेंट सुरक्षा लागू की है। इस व्यवस्था के तहत ट्रेड के बाद तीन कार्यदिवसों के भीतर सिक्योरिटीज़ और फंड का हस्तांतरण पूरा होना अनिवार्य है, जिससे बाजार सहभागियों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विस्तारित पहुँच से विदेशी पूँजी भारत के कमोडिटी सेक्टर में अधिक आकर्षित होगी, जिससे तरलता और मूल्य निर्धारण में सुधार हो सकता है। SEBI ने बताया है कि नई व्यवस्था शीघ्र ही लागू होगी, बशर्ते बाजार मध्यस्थों द्वारा आवश्यक अनुपालन हो।
यह निर्णय SEBI की व्यापक रणनीति को दर्शाता है, जिसमें बाजार पहुँच को उदार बनाते हुए जोखिम नियंत्रण को सुदृढ़ किया जा रहा है, और यह भारत के कमोडिटी बाजार की स्थिरता में विश्वास को संकेतित करता है।