📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ashutosh8159
धर्म
कबाड़ से बना शिव का विशाल प्रतिमा: सिवनी के मठ में कलाकारों ने तैयार किया अनोखा भोलेनाथ
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 24 अग. 2026, 12:03 PM
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कलाकार विक्की कश्यप और उनकी टीम ने तीन महीने में कबाड़ व अन्य कचरे से शिव की बड़ी प्रतिमा तैयार की, जिससे सिवनी के मठ में श्रद्धालु व कला प्रेमियों की भीड़ आई।
सिवनी, मध्य प्रदेश – कलाकार विक्की कश्यप की अगुवाई में एक टीम ने कबाड़ व अन्य कचरे से भगवान शिव की प्रभावशाली प्रतिमा तैयार की है। तीन महीने की मेहनत के बाद यह शिल्प मठ के परिसर में स्थापित हो गया है, जहाँ कचरे को पुनः उपयोग कर एक पवित्र रूप दिया गया है।
कलाकारों ने विभिन्न प्रकार के स्क्रैप को साफ़ करके, आकार देकर और जोड़कर शिव की आकृति बनाई। इस प्रयास ने पारंपरिक धार्मिक भावना को आधुनिक पर्यावरणीय जागरूकता के साथ जोड़ा है, जिससे लैंडफ़िल में जाने वाले कचरे को पूजा स्थल में बदला गया।
प्रतिमा के उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय अधिकारियों ने इसे क्षेत्र के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आकर्षण के रूप में सराहा है।
यह पहल पुनः उपयोग किए गए सामग्री से धार्मिक एवं सार्वजनिक कला बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, जो संसाधन बचत और आध्यात्मिक भावना को साथ-साथ आगे बढ़ाती है। आयोजकों की आशा है कि इस तरह की परियोजनाएँ राज्य भर में प्रेरणा बनेंगी।
मठ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, पर समुदाय की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस नवाचारी दृष्टिकोण की स्वीकृति को स्पष्ट करती है।
कलाकारों ने विभिन्न प्रकार के स्क्रैप को साफ़ करके, आकार देकर और जोड़कर शिव की आकृति बनाई। इस प्रयास ने पारंपरिक धार्मिक भावना को आधुनिक पर्यावरणीय जागरूकता के साथ जोड़ा है, जिससे लैंडफ़िल में जाने वाले कचरे को पूजा स्थल में बदला गया।
प्रतिमा के उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय अधिकारियों ने इसे क्षेत्र के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आकर्षण के रूप में सराहा है।
यह पहल पुनः उपयोग किए गए सामग्री से धार्मिक एवं सार्वजनिक कला बनाने की प्रवृत्ति को दर्शाती है, जो संसाधन बचत और आध्यात्मिक भावना को साथ-साथ आगे बढ़ाती है। आयोजकों की आशा है कि इस तरह की परियोजनाएँ राज्य भर में प्रेरणा बनेंगी।
मठ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है, पर समुदाय की सकारात्मक प्रतिक्रिया इस नवाचारी दृष्टिकोण की स्वीकृति को स्पष्ट करती है।