📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Christopher Voitus
अपराध
सतना की विशेष पीओसीएसओ अदालत ने नाबालिग को आजीवन कारावास, 2 लाख रुपये मुआवजा का आदेश
✍️ Amar Ujala · Satna
🗓 21 सित. 2026, 07:15 AM
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सतना की विशेष पीओसीएसओ अदालत ने नाबालिग को दुराचार के लिए आजीवन कारावास, 20,000 रुपये का जुर्माना और पीड़ित को 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
सतना की पीओसीएसओ (Protection of Children from Sexual Offences) विशेष अदालत ने यौन शोषण के आरोप में नाबालिग अपराधी के खिलाफ कठोर फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी, जिससे वह अपनी पूरी उम्र जेल में रहे।
सजा के साथ ही न्यायाधीश ने अपराधी पर 20,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, पीड़ित को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया, जिससे उसके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान की भरपाई हो सके।
यह फैसला मध्य प्रदेश में बाल यौन अपराधों के खिलाफ न्यायिक प्रणाली की कड़ी रुख को दर्शाता है और पीओसीएसओ अधिनियम के प्रावधानों को सुदृढ़ करता है, जिसका उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षा और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करना है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि नाबालिग पर आजीवन कारावास एक असाधारण उपाय है, जो अपराध की गंभीरता और निवारक प्रभाव को दर्शाता है। पीड़ित के परिवार ने इस निर्णय का स्वागत किया, जिससे शीघ्र मुआवजा और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल मिला।
यह मामला भारत में बढ़ते कठोर फैसलों में से एक है, जहाँ अदालतें पीओसीएसओ ढाँचे का उपयोग करके सभी आयु वर्ग के अपराधियों पर सख्त दंड लगा रही हैं, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
सजा के साथ ही न्यायाधीश ने अपराधी पर 20,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, पीड़ित को 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया, जिससे उसके शारीरिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान की भरपाई हो सके।
यह फैसला मध्य प्रदेश में बाल यौन अपराधों के खिलाफ न्यायिक प्रणाली की कड़ी रुख को दर्शाता है और पीओसीएसओ अधिनियम के प्रावधानों को सुदृढ़ करता है, जिसका उद्देश्य नाबालिगों की सुरक्षा और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करना है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि नाबालिग पर आजीवन कारावास एक असाधारण उपाय है, जो अपराध की गंभीरता और निवारक प्रभाव को दर्शाता है। पीड़ित के परिवार ने इस निर्णय का स्वागत किया, जिससे शीघ्र मुआवजा और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल मिला।
यह मामला भारत में बढ़ते कठोर फैसलों में से एक है, जहाँ अदालतें पीओसीएसओ ढाँचे का उपयोग करके सभी आयु वर्ग के अपराधियों पर सख्त दंड लगा रही हैं, ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।