🔥 TRENDING Mirzapur: The Movie launches lyrical v... FTPCCI and EAGLE Announce Drug-Free In... Hindustan Coca‑Cola Beverages to inves... Andhra Pradesh Announces New Land Refo... Karnataka Rejects Kasturirangan Report... Applied Materials to invest Rs 3,600 c...
16 Sep 2026
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা

सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ा सवाल: अफसरों पर कार्रवाई के साथ 250 पार्षदों की संपत्ति की भी हो जांच

✍️ Reporter: Rajeev Kumar Sharma 🗓 09 Sep 2026, 03:47 PM 👁 94
Watch on: ▶️ YouTube
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

सिर्फ कर्मचारियों पर गाज क्यों? पार्षदों की संपत्ति का हिसाब भी सार्वजनिक हो—कहां से आया इतना धन, इसकी हो पड़ताल

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर कार्रवाई शुरू हो गई है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है—क्या जवाबदेही सिर्फ निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित रहनी चाहिए?
अगर निगम व्यवस्था में भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी की जांच हो रही है, तो दिल्ली नगर निगम के सभी 250 पार्षदों की संपत्ति की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच क्यों न कराई जाए?
निगम पार्षद जनता के प्रतिनिधि हैं। उनके चुनावी हलफनामों में दर्ज संपत्ति, आय के स्रोत और पिछले वर्षों में हुई संपत्ति वृद्धि का मिलान किया जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। सवाल यह नहीं कि कोई पार्षद अमीर कैसे बना, बल्कि सवाल यह है कि उसकी घोषित आय और संपत्ति में हुई वृद्धि का स्रोत क्या है?
अवैध निर्माण पर भी उठते हैं सवाल
दिल्ली में अवैध निर्माण और बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित क्षेत्रों में किस जनप्रतिनिधि के कार्यकाल में कितने अवैध निर्माण हुए, कितनी शिकायतें आईं और उन पर निगम अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की।
जांच हो तो ‘नीचे से ऊपर’ तक
सत्य निकेतन जैसी घटना के बाद केवल किसी कर्मचारी या अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए।
यदि सभी 250 पार्षदों की संपत्ति का चुनाव पूर्व और वर्तमान रिकॉर्ड, आय के घोषित स्रोत तथा संपत्ति में हुई वृद्धि का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, तो यह पता चल सकता है कि किसकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई और उसका वैध स्रोत क्या है।
जनता का सवाल सीधा है—अगर व्यवस्था में कहीं भ्रष्टाचार है तो जांच की शुरुआत सिर्फ कर्मचारी से क्यों? राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
“संपत्ति जांच का मतलब किसी को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। जांच के बाद ही तय हो कि संपत्ति वैध है या नहीं।”
📲Get App