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सरपंच की उपेक्षा के चलते ग्रामीणों ने स्वयं संभाला विकास कार्यों का मोर्चा
स्थानीय ग्राम प्रधान द्वारा विकास कार्यों में उदासीनता बरतने के कारण ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपने गांव के विकास की जिम्मेदारी स्वयं उठा ली है।
गांव में विकास कार्यों की धीमी गति और स्थानीय नेतृत्व की ओर से अपेक्षित सहयोग न मिलने के चलते ग्रामवासियों ने अब स्वयं ही अपने गांव के उत्थान का बीड़ा उठाया है। यह निर्णय तब लिया गया जब यह स्पष्ट हो गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ और आवश्यक सुधार ग्राम प्रधान के स्तर पर लंबित पड़े हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने मिलकर श्रमदान करने और आवश्यक संसाधनों को जुटाने की योजना बनाई है ताकि गांव की मूलभूत सुविधाओं में सुधार लाया जा सके।
इस पहल से न केवल गांव के विकास को गति मिलेगी, बल्कि यह अन्य समुदायों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनेगी कि कैसे सामूहिक प्रयास से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। ग्रामीणों की यह सक्रियता स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक संदेश है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी बाहरी सहायता पर निर्भर नहीं रहना चाहते। उन्होंने मिलकर श्रमदान करने और आवश्यक संसाधनों को जुटाने की योजना बनाई है ताकि गांव की मूलभूत सुविधाओं में सुधार लाया जा सके।
इस पहल से न केवल गांव के विकास को गति मिलेगी, बल्कि यह अन्य समुदायों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बनेगी कि कैसे सामूहिक प्रयास से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। ग्रामीणों की यह सक्रियता स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक संदेश है।