अपराध
सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को जिला जज ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है।
जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड में आरोपी मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के तहत यह सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे अदा न करने पर पांच माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मृत्युदंड का निष्पादन माननीय उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा।
इससे पहले, अदालत ने दोनों को साक्ष्य मिटाने के अपराध में धारा 238(ए) के तहत सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुबह 10 बजे से ही अदालत के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा था। साढ़े 10 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। अदालत में जिला जज ने दोनों से उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में पूछा। सफाई में मुस्कान ने अपनी दो छोटी बेटियों का हवाला देते हुए न्याय की गुहार लगाई, जबकि साहिल खामोश रहा। दोनों ने अदालत के न्याय पर भरोसा जताया।
सवा 11 बजे से मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन और शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के बीच करीब सवा घंटे तक बहस चली। रेखा जैन ने जहां बचाव पक्ष की दलीलें पेश कीं, वहीं केके चौबे ने आरोपियों को फांसी दिलाने के लिए साक्ष्य और पुरानी घटनाओं का हवाला दिया। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने दोपहर चार बजे निर्णय सुनाने का समय तय किया।
शाम 4:05 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने कोर्ट पहुंचकर साहिल और मुस्कान को निर्णय की अंतिम घड़ी आने की बात कही और फिर सजा का ऐलान किया। निर्णय सुनते ही अधिवक्ताओं ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए तालियां बजाईं और कोर्ट रूम के बाहर भी खुशी का इजहार किया। अधिवक्ताओं ने इस निर्णय को एक मिसाल बताया।
इससे पहले, अदालत ने दोनों को साक्ष्य मिटाने के अपराध में धारा 238(ए) के तहत सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सुबह 10 बजे से ही अदालत के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा था। साढ़े 10 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। अदालत में जिला जज ने दोनों से उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य के बारे में पूछा। सफाई में मुस्कान ने अपनी दो छोटी बेटियों का हवाला देते हुए न्याय की गुहार लगाई, जबकि साहिल खामोश रहा। दोनों ने अदालत के न्याय पर भरोसा जताया।
सवा 11 बजे से मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन और शासकीय अधिवक्ता केके चौबे के बीच करीब सवा घंटे तक बहस चली। रेखा जैन ने जहां बचाव पक्ष की दलीलें पेश कीं, वहीं केके चौबे ने आरोपियों को फांसी दिलाने के लिए साक्ष्य और पुरानी घटनाओं का हवाला दिया। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने दोपहर चार बजे निर्णय सुनाने का समय तय किया।
शाम 4:05 बजे जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने कोर्ट पहुंचकर साहिल और मुस्कान को निर्णय की अंतिम घड़ी आने की बात कही और फिर सजा का ऐलान किया। निर्णय सुनते ही अधिवक्ताओं ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए तालियां बजाईं और कोर्ट रूम के बाहर भी खुशी का इजहार किया। अधिवक्ताओं ने इस निर्णय को एक मिसाल बताया।