स्थानीय
सपोटरा नगरपालिका में 9 दिनों से बकाया वेतन के लिए वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारियों की शांतिपूर्ण हड़ताल
राजस्थान के करौली जिले की सपोटरा नगरपालिका में वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारी पिछले 9 दिनों से अपने बकाया वेतन और मानदेय के लिए शांतिपूर्ण हड़ताल पर बैठे हैं। प्रशासन की लापरवाही के बीच त्योहारों के मौसम में भी कर्मचारी अपने हक के लिए सड़कों पर बैठे हैं।
राजस्थान के करौली जिले की सपोटरा नगरपालिका में वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारी पिछले 9 दिनों से अपने हक, बकाया वेतन और मानदेय के लिए शांतिपूर्ण हड़ताल पर बैठे हैं। कर्मचारी अपने निवाले और जायज हक के लिए धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई या समाधान नहीं सामने आया है।
व्यापक रूप से चल रहे त्योहारों के इस पावन समय में, जो समाज नगर की स्वच्छता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, वही समाज आज अपने पैसे के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर है। स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों ने प्रशासन की इस संवेदनहीनता और लापरवाही की कड़ी निंदा की है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन के आला अधिकारी अपने वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर इस दर्द को नहीं देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने पसीने की कमाई के लिए तरस रहा है, तो प्रशासन की उपेक्षा बेहद निंदनीय है।
कर्मचारियों ने प्रशासन से अपील की है कि वे समय रहते जागें और इन कर्मचारियों का बकाया वेतन तुरंत जारी करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासनिक शून्यता और कुंभकर्णी नींद जारी रही, तो इससे जनभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
व्यापक रूप से चल रहे त्योहारों के इस पावन समय में, जो समाज नगर की स्वच्छता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, वही समाज आज अपने पैसे के लिए सड़कों पर बैठने को मजबूर है। स्थानीय नागरिकों और कर्मचारियों ने प्रशासन की इस संवेदनहीनता और लापरवाही की कड़ी निंदा की है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन के आला अधिकारी अपने वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर इस दर्द को नहीं देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब समाज का एक बड़ा हिस्सा अपने पसीने की कमाई के लिए तरस रहा है, तो प्रशासन की उपेक्षा बेहद निंदनीय है।
कर्मचारियों ने प्रशासन से अपील की है कि वे समय रहते जागें और इन कर्मचारियों का बकाया वेतन तुरंत जारी करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासनिक शून्यता और कुंभकर्णी नींद जारी रही, तो इससे जनभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।