📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Madhurendra Kr
मनोरंजन
बिहार के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने 3 सेमी पीपल पत्ते पर नाना पाटेकर की तस्वीर उकेरी
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 08 अक्टू. 2026, 04:46 PM
👁 19
अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने तीन सेंटीमीटर के पीपल पत्ते पर नाना पाटेकर की तस्वीर उकेर कर श्रद्धांजलि दी, जिसके निर्माण में लगभग तीन घंटे लगे।
बिहार के अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने बॉलीवुड के दिग्गज नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि स्वरूप एक छोटे पीपल पत्ते पर उनकी तस्वीर उकेरी। यह कृति राज्य के कुछ कला प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों के सामने प्रदर्शित की गई।
लगभग तीन सेंटीमीटर लंबा यह पत्ता बारीकी से नक्काशी किया गया, जिसमें पाटेकर की विशिष्ट अभिव्यक्तियों को दर्शाने के लिये सूक्ष्म रेखाएँ और शेडिंग लागू की गई। इस नाजुक काम को पूरा करने में कलाकार ने लगभग तीन घंटे बिताए।
मुख्यतः बड़े‑पैमाने पर रेत की मूर्तियों के लिये प्रसिद्ध मधुरेंद्र ने इस बार पत्ते को एक असामान्य कैनवास बना कर अपनी कला की बहुमुखी प्रतिभा दिखायी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पाटेकर के भारतीय सिनेमा में योगदान और उनकी लोकप्रियता के प्रति व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक है।
यह सूक्ष्म चित्र सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जहाँ दर्शकों ने कलाकार की सटीकता और प्राकृतिक पत्ते को पोर्ट्रेट के रूप में उपयोग करने की नवीनता की सराहना की। उद्योग के कई सहयोगियों ने इसे डिजिटल युग में श्रद्धांजलि और दृश्य कला के नए मिश्रण के रूप में सराहा।
यह कृति भारतीय कलाकारों में माइक्रो‑माध्यमों के प्रयोग की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जो दृश्य श्रद्धांजलियों की सीमाओं को विस्तारित कर रही है।
लगभग तीन सेंटीमीटर लंबा यह पत्ता बारीकी से नक्काशी किया गया, जिसमें पाटेकर की विशिष्ट अभिव्यक्तियों को दर्शाने के लिये सूक्ष्म रेखाएँ और शेडिंग लागू की गई। इस नाजुक काम को पूरा करने में कलाकार ने लगभग तीन घंटे बिताए।
मुख्यतः बड़े‑पैमाने पर रेत की मूर्तियों के लिये प्रसिद्ध मधुरेंद्र ने इस बार पत्ते को एक असामान्य कैनवास बना कर अपनी कला की बहुमुखी प्रतिभा दिखायी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पाटेकर के भारतीय सिनेमा में योगदान और उनकी लोकप्रियता के प्रति व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक है।
यह सूक्ष्म चित्र सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जहाँ दर्शकों ने कलाकार की सटीकता और प्राकृतिक पत्ते को पोर्ट्रेट के रूप में उपयोग करने की नवीनता की सराहना की। उद्योग के कई सहयोगियों ने इसे डिजिटल युग में श्रद्धांजलि और दृश्य कला के नए मिश्रण के रूप में सराहा।
यह कृति भारतीय कलाकारों में माइक्रो‑माध्यमों के प्रयोग की प्रवृत्ति को उजागर करती है, जो दृश्य श्रद्धांजलियों की सीमाओं को विस्तारित कर रही है।