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समस्तीपुर में मध्याह्न भोजन योजना पर संकट: वेंडरों की चेतावनी, प्रधानाध्यापकों ने सौंपा ज्ञापन
मई 2026 से बकाया भुगतान न मिलने से नाराज वेंडरों ने 12 अक्टूबर से खाद्य सामग्री आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है। इस मामले में 400 से अधिक प्रधानाध्यापकों ने विभाग को ज्ञापन सौंपा है।
समस्तीपुर जिले में सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मई 2026 से मध्याह्न भोजन के लिए सामग्री उपलब्ध कराने वाले वेंडरों को बकाया भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। वेंडरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो वे 12 अक्टूबर से खाद्य सामग्री की आपूर्ति बंद कर देंगे।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए, जिले के 400 से अधिक प्रधानाध्यापकों ने संबंधित विभाग को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने विभाग से इस मामले का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है ताकि बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि यदि सामग्री की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो मध्याह्न भोजन योजना का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
वहीं, मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सूरत में योजना का संचालन बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 12 अक्टूबर से पहले वेंडरों के बकाया भुगतान का समाधान हो पाता है, या सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होती है। फिलहाल, विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए, जिले के 400 से अधिक प्रधानाध्यापकों ने संबंधित विभाग को एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने विभाग से इस मामले का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की है ताकि बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि यदि सामग्री की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो मध्याह्न भोजन योजना का संचालन मुश्किल हो जाएगा।
वहीं, मध्याह्न भोजन योजना के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सूरत में योजना का संचालन बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या 12 अक्टूबर से पहले वेंडरों के बकाया भुगतान का समाधान हो पाता है, या सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों के भोजन की व्यवस्था प्रभावित होती है। फिलहाल, विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।