🚩 सलकनपुर धाम
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*1. कहाँ है धाम?*
सीहोर जिले की रेहटी तहसील में, विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर। भोपाल से सिर्फ 70 KM दूर। धरातल से 1000 फीट ऊंचाई पर माँ विजयासन विराजी हैं।
*2. कितनी भीड़ आ रही है?*
इस शारदीय नवरात्रि (11 Oct से 20 Oct तक) रोज 1 लाख से ज्यादा भक्त आ रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन से ही पूरा मंदिर रोशनी से जगमगा रहा है।
*3. कैसे पहुंचें?*
- 1400 सीढ़ियां चढ़कर
- रोप-वे (ट्रॉली) से - 5 मिनट में ऊपर
- पक्की सड़क से गाड़ी से सीधे मंदिर तक
*4. लोग 300 KM पैदल क्यों आ रहे हैं?*
माँ विजयासन को मालवा-निमाड़ के लाखों लोग कुलदेवी मानते हैं। मान्यता है माँ सब कष्ट हरती हैं। इसलिए:
- इंदौर, बैतूल, बुधनी, बरेली, होशंगाबाद से लोग 200 से 300 KM पैदल यात्रा कर रहे हैं
- ढोल-नगाड़े, DJ, जयकारे लगाते हुए ग्रुप में आ रहे हैं
- कोई परिवार की सुख-शांति के लिए, कोई मन्नत मांगने
*5. आरती और दर्शन का पूरा टाइम टेबल:*
आज का टाइम (16 Oct 2026 के लिए):
- सुबह 5:30 बजे - पहली आरती
- सुबह 9:30 बजे - दूसरी आरती
- दोपहर 11:30 बजे - तीसरी आरती
- शाम 7:30 बजे - चौथी आरती
- रात 9:30 बजे - पांचवी आरती
- रात 12 बजे से सुबह 3 बजे तक - पट बंद (सफाई और शयन)
*6. आने वाले दिनों के बड़े कार्यक्रम:*
- 15 Oct (कल) - पंचमी पर माँ का भव्य श्रृंगार हो चुका है
- 18 Oct - अष्टमी की रात 12 बजे निशा पूजन और महाहवन
- 19 Oct - नवमी पर कन्या पूजन + विशाल भंडारा (हजारों लोगों के लिए)
- 20 Oct - विजयादशमी / दशहरे पर समापन
*7. पौराणिक कहानी - रक्तबीज वध:*
पुरानी कथा के अनुसार, रक्तबीज नाम का राक्षस था जिसके खून की बूंद जमीन पर गिरते ही नया राक्षस बन जाता था। देवता परेशान हो गए। तब माता पार्वती ने विकराल रूप लिया और इसी पहाड़ी पर रक्तबीज का वध किया। उसका खून जमीन पर गिरने से पहले पी लिया।
राक्षस पर विजय पाने के बाद देवताओं ने माता को एक विशेष आसन (सिंहासन) भेंट किया। तभी से इस जगह का नाम पड़ा *विजयासन धाम* - यानी विजय का आसन।
*8. प्रशासन की तैयारी:*
- 26 मजिस्ट्रेट ड्यूटी पर तैनात
- RTO ने बसों की चेकिंग शुरू - ओवरलोड बस नहीं चलेगी
- पेयजल, टॉयलेट, पार्किंग, CCTV, मेडिकल कैंप की व्यवस्था
- दुकानदारों को कहा गया है कचरा डस्टबिन में डालें, स्वच्छता रखें
*9. तुम्हारे लिए टिप:*
अगर जा रहे हो तो सुबह 4 बजे निकलो, 6 बजे तक पहुंच जाओगे। भीड़ कम रहेगी। जूते-चप्पल नीचे ही जमा होते हैं, इसलिए मोजे पहन के जाना। प्रसाद ऊपर भी मिलता है।
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*1. कहाँ है धाम?*
सीहोर जिले की रेहटी तहसील में, विंध्याचल पर्वत श्रृंखला पर। भोपाल से सिर्फ 70 KM दूर। धरातल से 1000 फीट ऊंचाई पर माँ विजयासन विराजी हैं।
*2. कितनी भीड़ आ रही है?*
इस शारदीय नवरात्रि (11 Oct से 20 Oct तक) रोज 1 लाख से ज्यादा भक्त आ रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन से ही पूरा मंदिर रोशनी से जगमगा रहा है।
*3. कैसे पहुंचें?*
- 1400 सीढ़ियां चढ़कर
- रोप-वे (ट्रॉली) से - 5 मिनट में ऊपर
- पक्की सड़क से गाड़ी से सीधे मंदिर तक
*4. लोग 300 KM पैदल क्यों आ रहे हैं?*
माँ विजयासन को मालवा-निमाड़ के लाखों लोग कुलदेवी मानते हैं। मान्यता है माँ सब कष्ट हरती हैं। इसलिए:
- इंदौर, बैतूल, बुधनी, बरेली, होशंगाबाद से लोग 200 से 300 KM पैदल यात्रा कर रहे हैं
- ढोल-नगाड़े, DJ, जयकारे लगाते हुए ग्रुप में आ रहे हैं
- कोई परिवार की सुख-शांति के लिए, कोई मन्नत मांगने
*5. आरती और दर्शन का पूरा टाइम टेबल:*
आज का टाइम (16 Oct 2026 के लिए):
- सुबह 5:30 बजे - पहली आरती
- सुबह 9:30 बजे - दूसरी आरती
- दोपहर 11:30 बजे - तीसरी आरती
- शाम 7:30 बजे - चौथी आरती
- रात 9:30 बजे - पांचवी आरती
- रात 12 बजे से सुबह 3 बजे तक - पट बंद (सफाई और शयन)
*6. आने वाले दिनों के बड़े कार्यक्रम:*
- 15 Oct (कल) - पंचमी पर माँ का भव्य श्रृंगार हो चुका है
- 18 Oct - अष्टमी की रात 12 बजे निशा पूजन और महाहवन
- 19 Oct - नवमी पर कन्या पूजन + विशाल भंडारा (हजारों लोगों के लिए)
- 20 Oct - विजयादशमी / दशहरे पर समापन
*7. पौराणिक कहानी - रक्तबीज वध:*
पुरानी कथा के अनुसार, रक्तबीज नाम का राक्षस था जिसके खून की बूंद जमीन पर गिरते ही नया राक्षस बन जाता था। देवता परेशान हो गए। तब माता पार्वती ने विकराल रूप लिया और इसी पहाड़ी पर रक्तबीज का वध किया। उसका खून जमीन पर गिरने से पहले पी लिया।
राक्षस पर विजय पाने के बाद देवताओं ने माता को एक विशेष आसन (सिंहासन) भेंट किया। तभी से इस जगह का नाम पड़ा *विजयासन धाम* - यानी विजय का आसन।
*8. प्रशासन की तैयारी:*
- 26 मजिस्ट्रेट ड्यूटी पर तैनात
- RTO ने बसों की चेकिंग शुरू - ओवरलोड बस नहीं चलेगी
- पेयजल, टॉयलेट, पार्किंग, CCTV, मेडिकल कैंप की व्यवस्था
- दुकानदारों को कहा गया है कचरा डस्टबिन में डालें, स्वच्छता रखें
*9. तुम्हारे लिए टिप:*
अगर जा रहे हो तो सुबह 4 बजे निकलो, 6 बजे तक पहुंच जाओगे। भीड़ कम रहेगी। जूते-चप्पल नीचे ही जमा होते हैं, इसलिए मोजे पहन के जाना। प्रसाद ऊपर भी मिलता है।
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