📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Komoro no kaze
कृषि
भंडारण में सोयाबीन, मक्का और मटर के बीजों पर कीट नियंत्रण के लिए चावल की भूसी राख
✍️ TRIPURA STAR NEWS
🗓 28 अग. 2026, 09:49 PM
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ट्रिपुरा स्टार न्यूज़ ने बताया कि चावल की भूसी राख को भंडारित सोयाबीन, मक्का और मटर के बीजों में कीट क्षति को रोकने के प्राकृतिक उपाय के रूप में जांचा जा रहा है।
ट्रिपुरा स्टार न्यूज़ ने चावल की भूसी राख को भंडारित दाल और अनाज के बीजों में कीटों से बचाव के संभावित उपाय के रूप में उभारा है। चावल मिलिंग के बाद बची इस राख को सोयाबीन, मक्का और मटर के बीजों में कीटों के प्रकोप को रोकने के लिए परीक्षण किया जा रहा है।
प्रारंभिक अवलोकनों से पता चलता है कि सिलिका‑समृद्ध इस सूक्ष्म पदार्थ से कीटों के लिए अनुकूल माहौल बनाना कठिन हो जाता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता घट सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि अपशिष्ट का इस तरह उपयोग किसानों के लिए किफायती और पर्यावरण‑मित्र विकल्प प्रदान कर सकता है।
यदि आगे के परीक्षणों में इसकी प्रभावशीलता सिद्ध होती है, तो चावल की भूसी राख को देश भर में मौजूदा बीज‑भंडारण प्रक्रियाओं में शामिल किया जा सकता है, जिससे फसल उत्पादन की सुरक्षा और कटाई‑बाद के नुकसान में कमी आएगी।
रिपोर्ट में विस्तृत प्रयोगात्मक आँकड़े नहीं दिए गए हैं, पर यह भारतीय कृषि में कम लागत, टिकाऊ कीट‑प्रबंधन समाधान की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।
प्रारंभिक अवलोकनों से पता चलता है कि सिलिका‑समृद्ध इस सूक्ष्म पदार्थ से कीटों के लिए अनुकूल माहौल बनाना कठिन हो जाता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता घट सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि अपशिष्ट का इस तरह उपयोग किसानों के लिए किफायती और पर्यावरण‑मित्र विकल्प प्रदान कर सकता है।
यदि आगे के परीक्षणों में इसकी प्रभावशीलता सिद्ध होती है, तो चावल की भूसी राख को देश भर में मौजूदा बीज‑भंडारण प्रक्रियाओं में शामिल किया जा सकता है, जिससे फसल उत्पादन की सुरक्षा और कटाई‑बाद के नुकसान में कमी आएगी।
रिपोर्ट में विस्तृत प्रयोगात्मक आँकड़े नहीं दिए गए हैं, पर यह भारतीय कृषि में कम लागत, टिकाऊ कीट‑प्रबंधन समाधान की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।