📷 चित्र स्रोत: Times of India (via NewsData)
विदेश
नेपाल में बाढ़ से फंसे 500 लोगों को बचाने के लिए बचाव दलों ने शुरू किया कठिन अभियान
✍️ Times of India
🗓 30 अग. 2026, 07:09 AM
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फ्लैश बाढ़ से प्रभावित नेपाल के छह जलविद्युत परियोजनाओं में 500 से अधिक लोगों को फंसे हुए माना जा रहा है, जिससे सेना और पुलिस ने कठिन मौसम व पहाड़ी इलाकों में बचाव कार्य शुरू किया है।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने छह जलविद्युत परियोजनाओं को पानी में डुबो दिया, जिससे 500 से अधिक कामगार और स्थानीय लोग फंसे हुए माने जा रहे हैं। बाढ़ ने पहुंच मार्गों को नष्ट कर दिया और महत्वपूर्ण ढाँचे को डुबो दिया, जिससे क्षेत्र अब कठिन पहुँच वाले बन गए हैं।
नेपाल सेना ने सशस्त्र पुलिस की मदद से जमीनी बचाव दल तैनात किए हैं। बचावकर्ता भारी बारिश, खड़ी पहाड़ियों और भू-स्खलन जैसी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जो कार्य को धीमा कर रही हैं। फिर भी वे हर संभव प्रयास कर फंसे लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।
दृश्यता और पहुँच की समस्या को हल करने के लिये ड्रोन का उपयोग करके बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का मानचित्रण किया जा रहा है और फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाया जा रहा है। साथ ही मोबाइल ड्रिलिंग रिग्स से अस्थायी छेद बनाए जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति और बचाव कर्मियों को जलविद्युत संयंत्रों के कठिन हिस्सों तक पहुँचाया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य अभी जारी है और टीमें रात-दिन काम कर रही हैं। प्राथमिकता फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, चिकित्सा सहायता प्रदान करना और आगे की राहत के लिये सुरक्षित मार्ग स्थापित करना है।
नेपाल सेना ने सशस्त्र पुलिस की मदद से जमीनी बचाव दल तैनात किए हैं। बचावकर्ता भारी बारिश, खड़ी पहाड़ियों और भू-स्खलन जैसी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जो कार्य को धीमा कर रही हैं। फिर भी वे हर संभव प्रयास कर फंसे लोगों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।
दृश्यता और पहुँच की समस्या को हल करने के लिये ड्रोन का उपयोग करके बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का मानचित्रण किया जा रहा है और फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाया जा रहा है। साथ ही मोबाइल ड्रिलिंग रिग्स से अस्थायी छेद बनाए जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति और बचाव कर्मियों को जलविद्युत संयंत्रों के कठिन हिस्सों तक पहुँचाया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य अभी जारी है और टीमें रात-दिन काम कर रही हैं। प्राथमिकता फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, चिकित्सा सहायता प्रदान करना और आगे की राहत के लिये सुरक्षित मार्ग स्थापित करना है।