📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhrasingh
बिज़नेस
आरबीआई ने राज्य‑स्वामित्व वाली तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर विंडो खोली
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🗓 10 अक्टू. 2026, 07:32 PM
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रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने राज्य‑स्वामित्व वाली तेल मार्केटिंग कंपनियों को डॉलर उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष विदेशी मुद्रा विंडो खोली, जिससे उनकी आयात‑संबंधी मुद्रा दबाव कम हो सके।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने राज्य‑स्वामित्व वाली तेल मार्केटिंग कंपनियों को डॉलर उपलब्ध कराने के लिए एक विशेष विदेशी मुद्रा विंडो की घोषणा की। यह कदम इन कंपनियों को कच्चे तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात हेतु आवश्यक विदेशी मुद्रा की उपलब्धता को सहज बनाने के लिए उठाया गया है।
इस विंडो का उपयोग भारतीय तेल निगम, भारत पेट्रोलियम निगम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम जैसी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए किया जाएगा, जो देश के तेल वितरण का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। RBI के माध्यम से सीधे डॉलर की आपूर्ति से बाजार में देरी कम होगी।
आरबीआई ने बताया कि डॉलर आवंटन प्राथमिकता के आधार पर, अपने सामान्य नियमों और सीमाओं के तहत किया जाएगा। इस व्यवस्था की समय‑समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि तेल क्षेत्र की बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की आसान उपलब्धता आयात लागत को स्थिर करने में मदद कर सकती है और इससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव वैश्विक तेल मूल्यों और घरेलू मांग पर निर्भर करेगा।
आरबीआई ने कहा कि यह विशेष विंडो तत्काल मुद्रा दबाव को कम करने के लिए एक अस्थायी उपाय है और यह उसकी विदेशी मुद्रा नीति में व्यापक बदलाव का संकेत नहीं देता।
इस विंडो का उपयोग भारतीय तेल निगम, भारत पेट्रोलियम निगम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम जैसी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के लिए किया जाएगा, जो देश के तेल वितरण का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। RBI के माध्यम से सीधे डॉलर की आपूर्ति से बाजार में देरी कम होगी।
आरबीआई ने बताया कि डॉलर आवंटन प्राथमिकता के आधार पर, अपने सामान्य नियमों और सीमाओं के तहत किया जाएगा। इस व्यवस्था की समय‑समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि तेल क्षेत्र की बदलती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
विश्लेषकों का मानना है कि डॉलर की आसान उपलब्धता आयात लागत को स्थिर करने में मदद कर सकती है और इससे उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव वैश्विक तेल मूल्यों और घरेलू मांग पर निर्भर करेगा।
आरबीआई ने कहा कि यह विशेष विंडो तत्काल मुद्रा दबाव को कम करने के लिए एक अस्थायी उपाय है और यह उसकी विदेशी मुद्रा नीति में व्यापक बदलाव का संकेत नहीं देता।