📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
मनोरंजन
रासिका दुगल ने भारतीय सिनेमा में बच्चों की फ़िल्मों के घटते स्थान को उजागर किया
✍️ Filmibeat
🗓 31 अक्टू. 2026, 10:00 AM
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अभिनेत्री रासिका दुगल ने फ़िल्मीबीत को बताया कि भारतीय सिनेमा में बच्चों की फ़िल्मों के लिए अवसर बहुत कम हैं और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की अपील की।
विनोदपूर्ण अभिनेत्री रासिका दुगल ने फ़िल्मीबीत को बताया कि भारतीय सिनेमा में बच्चों की फ़िल्मों के लिए समर्पित स्थान बहुत ही कम है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के फ़िल्में वयस्क‑केन्द्रित कहानियों पर ही टिके रहती हैं, जबकि छोटे दर्शकों के लिए बने प्रोजेक्ट्स को वित्तीय समर्थन और सिनेमाघरों में स्क्रीनिंग दोनों में कमी का सामना करना पड़ता है।
दुगल ने तर्क दिया कि इस अंतर से न केवल रचनात्मक प्रयोग सीमित होते हैं, बल्कि बच्चों को अपने जीवन से जुड़ी, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक कहानियों से वंचित किया जाता है। उन्होंने निर्माताओं, वितरकों और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म को बच्चों के कंटेंट की व्यावसायिक और शैक्षिक संभावनाओं को पहचानने का आह्वान किया।
यह टिप्पणी भारतीय फ़िल्म उद्योग में विविध सामग्री पोर्टफ़ोलियो बनाने और अनछुए बाजार खंडों को जोड़ने के व्यापक बहस के बीच आई है। दुगल के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि दर्शकों और फ़िल्म निर्माताओं दोनों की इच्छा है कि बच्चों के लिए अधिक समावेशी कहानियों को बढ़ावा दिया जाए।
यदि दुगल के सुझावों को अपनाया गया, तो विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल नई आय के स्रोत खोल सकता है, बल्कि भारत के भीतर छोटे‑बड़े कलाकारों के विकास में भी सहायक होगा।
दुगल ने तर्क दिया कि इस अंतर से न केवल रचनात्मक प्रयोग सीमित होते हैं, बल्कि बच्चों को अपने जीवन से जुड़ी, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक कहानियों से वंचित किया जाता है। उन्होंने निर्माताओं, वितरकों और स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म को बच्चों के कंटेंट की व्यावसायिक और शैक्षिक संभावनाओं को पहचानने का आह्वान किया।
यह टिप्पणी भारतीय फ़िल्म उद्योग में विविध सामग्री पोर्टफ़ोलियो बनाने और अनछुए बाजार खंडों को जोड़ने के व्यापक बहस के बीच आई है। दुगल के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि दर्शकों और फ़िल्म निर्माताओं दोनों की इच्छा है कि बच्चों के लिए अधिक समावेशी कहानियों को बढ़ावा दिया जाए।
यदि दुगल के सुझावों को अपनाया गया, तो विशेषज्ञों का मानना है कि यह न केवल नई आय के स्रोत खोल सकता है, बल्कि भारत के भीतर छोटे‑बड़े कलाकारों के विकास में भी सहायक होगा।