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राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझाइश से 4713 प्रकरणों का निस्तारण, 10.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सेटलमेंट
बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया
राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी समझाइश से 4713 प्रकरणों का निस्तारण, 10.15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का सेटलमेंट
बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया
दौसा, 10 अक्टूबर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में आपसी समझाइश एवं राजीनामे के माध्यम से जिले में राजस्व एवं फौजदारी न्यायालयों सहित विभिन्न न्यायालयों में लंबित कुल 4713 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इस दौरान करीब 10 करोड़ 15 लाख 29 हजार 549 रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संतोष अग्रवाल, विशिष्ट न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) प्रकरण न्यायालय, दौसा नम्रता पारीक तथा वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माधवी गोस्वामी ने एडीआर सेंटर पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
जिले में लोक अदालत बेंचों का गठन
जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक के निर्देशन में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 10 लोक अदालत बेंचों का गठन किया गया। इनमें दौसा मुख्यालय पर तीन तथा बांदीकुई, लालसोट, महवा एवं सिकराय तालुका में कुल सात बेंच गठित की गईं।
दौसा मुख्यालय पर गठित बेंचों में प्रथम बेंच में विशिष्ट न्यायाधीश नम्रता पारीक, अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार शर्मा एवं स्थाई लोक अदालत के सदस्य सुरेश कुमार गोयल शामिल रहे। द्वितीय बेंच में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माधवी गोस्वामी तथा अधिवक्ता मुकुट बिहारी शर्मा रहे। वहीं, तृतीय बेंच में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल, तहसीलदार गजानंद मीणा एवं अधिवक्ता हरचंदा मीना ने पक्षकारों के मध्य समझाइश कर प्रकरणों के निस्तारण में सहयोग किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष कुंज बिहारी शर्मा सहित बार के सदस्यों का भी पूर्ण सहयोग रहा।
*विभिन्न प्रकृति के प्रकरणों का हुआ निस्तारण*
राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरणों, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), पारिवारिक विवाद, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली एवं पानी के बिलों से संबंधित प्रकरण, राजस्व मामलों तथा विभिन्न प्रकार के सिविल मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, क्षतिपूर्ति एवं विनिर्दिष्ट पालना से संबंधित दावे भी शामिल रहे।
लोक अदालत बेंचों के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने पक्षकारों को आपसी संवाद, समझाइश एवं राजीनामे के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित किया। लोक अदालत में बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे और प्रकरणों के निस्तारण में सहयोग किया।
*बैंकों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग*
प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निस्तारण के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, राजस्थान ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित श्रीराम फाइनेंस, हीरो फिनकॉर्प, टीवीएस क्रेडिट एवं बीएसएस सोनाटा के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन संस्थानों से संबंधित प्रकरणों में भी पक्षकारों के बीच समझाइश के माध्यम से समाधान के प्रयास किए गए।
बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया
दौसा, 10 अक्टूबर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में आपसी समझाइश एवं राजीनामे के माध्यम से जिले में राजस्व एवं फौजदारी न्यायालयों सहित विभिन्न न्यायालयों में लंबित कुल 4713 प्रकरणों का निस्तारण किया गया। इस दौरान करीब 10 करोड़ 15 लाख 29 हजार 549 रुपये की राशि का सेटलमेंट हुआ। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संतोष अग्रवाल, विशिष्ट न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) प्रकरण न्यायालय, दौसा नम्रता पारीक तथा वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माधवी गोस्वामी ने एडीआर सेंटर पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
जिले में लोक अदालत बेंचों का गठन
जिला एवं सेशन न्यायाधीश केशव कौशिक के निर्देशन में राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 10 लोक अदालत बेंचों का गठन किया गया। इनमें दौसा मुख्यालय पर तीन तथा बांदीकुई, लालसोट, महवा एवं सिकराय तालुका में कुल सात बेंच गठित की गईं।
दौसा मुख्यालय पर गठित बेंचों में प्रथम बेंच में विशिष्ट न्यायाधीश नम्रता पारीक, अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार शर्मा एवं स्थाई लोक अदालत के सदस्य सुरेश कुमार गोयल शामिल रहे। द्वितीय बेंच में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माधवी गोस्वामी तथा अधिवक्ता मुकुट बिहारी शर्मा रहे। वहीं, तृतीय बेंच में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल, तहसीलदार गजानंद मीणा एवं अधिवक्ता हरचंदा मीना ने पक्षकारों के मध्य समझाइश कर प्रकरणों के निस्तारण में सहयोग किया। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष कुंज बिहारी शर्मा सहित बार के सदस्यों का भी पूर्ण सहयोग रहा।
*विभिन्न प्रकृति के प्रकरणों का हुआ निस्तारण*
राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरणों, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), पारिवारिक विवाद, श्रम एवं नियोजन संबंधी विवाद, भूमि अधिग्रहण, बिजली एवं पानी के बिलों से संबंधित प्रकरण, राजस्व मामलों तथा विभिन्न प्रकार के सिविल मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, क्षतिपूर्ति एवं विनिर्दिष्ट पालना से संबंधित दावे भी शामिल रहे।
लोक अदालत बेंचों के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने पक्षकारों को आपसी संवाद, समझाइश एवं राजीनामे के माध्यम से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित किया। लोक अदालत में बड़ी संख्या में पक्षकार उपस्थित रहे और प्रकरणों के निस्तारण में सहयोग किया।
*बैंकों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग*
प्री-लिटिगेशन प्रकरणों के निस्तारण के लिए जयपुर विद्युत वितरण निगम, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, केनरा बैंक, इंडियन बैंक, आईडीबीआई बैंक, राजस्थान ग्रामीण बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित श्रीराम फाइनेंस, हीरो फिनकॉर्प, टीवीएस क्रेडिट एवं बीएसएस सोनाटा के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन संस्थानों से संबंधित प्रकरणों में भी पक्षकारों के बीच समझाइश के माध्यम से समाधान के प्रयास किए गए।