स्वास्थ्य
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल में वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर पहली कार्यशाला, 100 से अधिक चिकित्सकों ने भाग लिया
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल ने वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर पहली सीएमई एवं हैंड्स‑ऑन कार्यशाला आयोजित की, जिसमें सौ से अधिक डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक के प्रशिक्षण में भाग लिया।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल ने वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर पहली सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) एवं हैंड्स‑ऑन कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें एक सौ से अधिक चिकित्सकों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लानिंग, जबड़े के पुनर्निर्माण, दंत इम्प्लांट और रोबोटिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को सिमुलेशन सॉफ़्टवेयर और रोबोटिक उपकरणों का वास्तविक उपयोग करके अभ्यास करने का अवसर मिला।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य रोगियों के चेहरे की बनावट, चबाने और बोलने की क्षमता को आधुनिक तकनीक के माध्यम से बहाल करना और उपचार की सफलता दर को बढ़ाना है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला, नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा जनसम्पर्क मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला।
आयोजन के बाद उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ भविष्य में अधिक सटीक और कम आक्रामक सर्जरी को संभव बनाकर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएंगी।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने डिजिटल प्लानिंग, जबड़े के पुनर्निर्माण, दंत इम्प्लांट और रोबोटिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को सिमुलेशन सॉफ़्टवेयर और रोबोटिक उपकरणों का वास्तविक उपयोग करके अभ्यास करने का अवसर मिला।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य रोगियों के चेहरे की बनावट, चबाने और बोलने की क्षमता को आधुनिक तकनीक के माध्यम से बहाल करना और उपचार की सफलता दर को बढ़ाना है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, डॉ. मोहन यादव, राजेंद्र शुक्ला, नरेंद्र शिवाजी पटेल तथा जनसम्पर्क मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया और स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला।
आयोजन के बाद उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ भविष्य में अधिक सटीक और कम आक्रामक सर्जरी को संभव बनाकर रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाएंगी।