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17 अक्टू. 2026•
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स्थानीय

रनगांव के किनवार ड्योढ़ी में 150 साल से अधिक पुरानी दुर्गा पूजा में कलश की होती है पूजा

✍️ रिपोर्टर: Paras Kumar Singh 🗓 17 अक्टू. 2026, 08:22 PM 👁 14
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धोरैया प्रखंड के रनगांव स्थित किनवार ड्योढ़ी दुर्गा मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ 150 वर्षों से अधिक समय से मूर्ति के स्थान पर कलश की पूजा की जाती है।

बिहार के बांका जिले के धोरैया प्रखंड अंतर्गत रनगांव के किनवार ड्योढ़ी में स्थित दुर्गा मंदिर अपनी 150 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। यहाँ दुर्गा पूजा का आयोजन अत्यंत पारंपरिक और भव्य सजावट के साथ किया जाता है, लेकिन सबसे अनूठी बात यह है कि यहाँ माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापित नहीं की जाती, बल्कि पाँच दिनों तक कलश की पूजा होती है।

मंदिर के पूजा आयोजक रोमी सिंह ने बताया कि इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण किनवार ड्योढ़ी के राजपूत परिवार के पूर्वज जमींदार बाबू उमराव सिंह ने अपनी कुलदेवी के रूप में कराया था। तभी से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने के बजाय कलश की पूजा की जाती है।

परंपरा के अनुसार, पूजा के दौरान किनवार वंश के सबसे बुजुर्ग सदस्य की पत्नी माँ का श्रंगार सिंदूर से करती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि साल भर में केवल इसी विशेष दिन माँ का श्रंगार किया जाता है, जिसके बाद कलश पूजन की प्रक्रिया संपन्न होती है। यह अनूठी परंपरा स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है और दूर-दूर से श्रद्धालु इस अनोखे उत्सव में भाग लेने आते हैं।
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