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राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी का हनुमानगढ़ दौरा, जेल और संगरिया थाने की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी ने 26 और 27 अक्टूबर को हनुमानगढ़ जिले के दौरे के दौरान मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आमजन के अधिकारों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर चर्चा की। दौरे के दौरान जिला कारागृह हनुमानगढ़ और पुलिस थाना संगरिया का निरीक्षण भी किया गया।
राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी का हनुमानगढ़ दौरा, जेल और संगरिया थाने की व्यवस्थाओं का लिया जायजा
हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी ने 26 और 27 अक्टूबर को हनुमानगढ़ जिले के दौरे के दौरान मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आमजन के अधिकारों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर चर्चा की। दौरे के दौरान जिला कारागृह हनुमानगढ़ और पुलिस थाना संगरिया का निरीक्षण भी किया गया।
अधिकारियों के साथ बैठक में मानवाधिकारों पर चर्चा
दौरे के पहले दिन 26 अक्टूबर को सर्किट हाउस में आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में आमजन की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, विभागीय कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के प्रति अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और लोगों की समस्याओं का नियमानुसार समाधान करने के निर्देश दिए।
जिला कारागृह में बंदियों से किया संवाद
27 अक्टूबर को जस्टिस मूलचंदानी ने जिला कारागृह हनुमानगढ़ पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बंदियों से बातचीत कर भोजन, स्वच्छता, रहने की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही चिकित्सा सुविधाओं, आवश्यकता के अनुसार पृथक मेडिकल वार्ड तथा पात्र बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने की व्यवस्था का भी जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जेल परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने, बंदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीवाईएसपी करण सिंह, जेल अधीक्षक सुरेश कुमार और तहसीलदार राजकुमारी उपस्थित रहीं।
संगरिया थाने में महिला हेल्प डेस्क और हवालात की जांच
जिला कारागृह के निरीक्षण के बाद आयोग अध्यक्ष ने पुलिस थाना संगरिया का दौरा किया। यहां उन्होंने स्वागत कक्ष, महिला हेल्प डेस्क और हवालात का निरीक्षण कर पुलिस थाने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिवाद एवं आगंतुक रजिस्टरों की जांच के साथ सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का भी जायजा लिया।
इस दौरान थाने में शिकायत लेकर आने वाले लोगों के साथ पुलिस के व्यवहार, महिला संबंधी मामलों में कार्रवाई तथा पुलिस अभिरक्षा में रखे जाने वाले व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
मानवाधिकार संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि जिला कारागृह और पुलिस थानों में मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा शिकायतों के निस्तारण, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए।
जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी के इस दो दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य जिले में मानवाधिकार संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और संबंधित विभागों को आवश्यक सुधार के लिए दिशा-निर्देश देना रहा।
हनुमानगढ़। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी ने 26 और 27 अक्टूबर को हनुमानगढ़ जिले के दौरे के दौरान मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर आमजन के अधिकारों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं पर चर्चा की। दौरे के दौरान जिला कारागृह हनुमानगढ़ और पुलिस थाना संगरिया का निरीक्षण भी किया गया।
अधिकारियों के साथ बैठक में मानवाधिकारों पर चर्चा
दौरे के पहले दिन 26 अक्टूबर को सर्किट हाउस में आयोग अध्यक्ष की अध्यक्षता में जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल यादव और जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में आमजन की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, विभागीय कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के प्रति अधिकारियों की जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने और लोगों की समस्याओं का नियमानुसार समाधान करने के निर्देश दिए।
जिला कारागृह में बंदियों से किया संवाद
27 अक्टूबर को जस्टिस मूलचंदानी ने जिला कारागृह हनुमानगढ़ पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बंदियों से बातचीत कर भोजन, स्वच्छता, रहने की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही चिकित्सा सुविधाओं, आवश्यकता के अनुसार पृथक मेडिकल वार्ड तथा पात्र बंदियों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने की व्यवस्था का भी जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जेल परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने, बंदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीवाईएसपी करण सिंह, जेल अधीक्षक सुरेश कुमार और तहसीलदार राजकुमारी उपस्थित रहीं।
संगरिया थाने में महिला हेल्प डेस्क और हवालात की जांच
जिला कारागृह के निरीक्षण के बाद आयोग अध्यक्ष ने पुलिस थाना संगरिया का दौरा किया। यहां उन्होंने स्वागत कक्ष, महिला हेल्प डेस्क और हवालात का निरीक्षण कर पुलिस थाने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने परिवाद एवं आगंतुक रजिस्टरों की जांच के साथ सीसीटीवी कैमरों की स्थिति का भी जायजा लिया।
इस दौरान थाने में शिकायत लेकर आने वाले लोगों के साथ पुलिस के व्यवहार, महिला संबंधी मामलों में कार्रवाई तथा पुलिस अभिरक्षा में रखे जाने वाले व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।
मानवाधिकार संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि जिला कारागृह और पुलिस थानों में मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति के साथ सम्मानजनक एवं संवेदनशील व्यवहार किया जाए तथा शिकायतों के निस्तारण, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए।
जस्टिस गंगाराम मूलचंदानी के इस दो दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य जिले में मानवाधिकार संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना और संबंधित विभागों को आवश्यक सुधार के लिए दिशा-निर्देश देना रहा।