📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nico Crisafulli from USA
बिज़नेस
राजस्थान के व्यापारियों ने यूपीआई चार्ज़ पर विरोध, सेवा बंद करने की चेतावनी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 18 सित. 2026, 03:31 PM
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राजस्थान के छोटे व्यापारियों ने यूपीआई पर नए MDR के खिलाफ विरोध जताया, कहा यह शुल्क ग्राहक पर पड़ेगा और यूपीआई बंद करने की चेतावनी दी।
राजस्थान के छोटे व्यापारियों ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) पर लागू होने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। व्यापारी दावा करते हैं कि प्रत्येक डिजिटल लेन‑देन पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क अंततः ग्राहक पर पड़ेगा, जिससे UPI की किफ़ायती सुविधा कमज़ोर होगी।
कई व्यापारिक संघों ने बयान जारी कर कहा है कि यदि MDR लागू किया गया तो वे UPI भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे। उनका मानना है कि इस लागत वृद्धि से नकद‑आधारित ग्राहकों को फिर से पारंपरिक भुगतान तरीकों की ओर धकेला जा सकता है, जिससे राज्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था की प्रगति बाधित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि MDR एक व्यापक नियामक कदम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सभी भुगतान प्लेटफ़ॉर्म पर शुल्क को समान करना है। परंतु राजस्थान में इस विरोध से नीति के लक्ष्य और व्यापारियों की वास्तविकताओं के बीच तनाव स्पष्ट हो रहा है। यह विरोध शांति‑पूर्ण रूप से जारी है, जहाँ व्यापारी बैठकें और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं।
राज्य सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और यदि व्यापारी UPI बंद करने की चेतावनी को लागू करते हैं तो यह नीति के राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है।
कई व्यापारिक संघों ने बयान जारी कर कहा है कि यदि MDR लागू किया गया तो वे UPI भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे। उनका मानना है कि इस लागत वृद्धि से नकद‑आधारित ग्राहकों को फिर से पारंपरिक भुगतान तरीकों की ओर धकेला जा सकता है, जिससे राज्य में डिजिटल अर्थव्यवस्था की प्रगति बाधित होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि MDR एक व्यापक नियामक कदम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सभी भुगतान प्लेटफ़ॉर्म पर शुल्क को समान करना है। परंतु राजस्थान में इस विरोध से नीति के लक्ष्य और व्यापारियों की वास्तविकताओं के बीच तनाव स्पष्ट हो रहा है। यह विरोध शांति‑पूर्ण रूप से जारी है, जहाँ व्यापारी बैठकें और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं।
राज्य सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, और यदि व्यापारी UPI बंद करने की चेतावनी को लागू करते हैं तो यह नीति के राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता है।