📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rasikdave
राजनीति
राजस्थान ने पंचायती पदों के उम्मीदवारों से शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता हटाई
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 09 अक्टू. 2026, 03:00 PM
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राज्य सरकार ने आगामी पंचायती राज चुनाव में पंच और सरपंच पदों के उम्मीदवारों से न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता हटा दी, जिससे प्रमाणपत्र के बिना भी नामांकन किया जा सकेगा।
जयपुर, राजस्थान – स्थानीय शासन में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान चुनाव प्राधिकरण ने यह घोषणा की है कि पंच और सरपंच पदों के उम्मीदवारों को अब न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। राज्य के पंचायती राज अधिनियम के तहत यह बदलाव किया गया है, जिससे पहले आवश्यक द्वितीय स्तर की शिक्षा की शर्त हटा दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि यह परिवर्तन ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक शिक्षा के स्तर के कम होने के कारण उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए है। साथ ही, नामांकन फॉर्म में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर भी उम्मीदवारों को दिया जाएगा, इससे पहले कि अंतिम सूची प्रकाशित हो।
यह संशोधित दिशा-निर्देश आगामी पंचायती राज चुनावों पर लागू होंगे, जो इस वर्ष के बाद में आयोजित किए जाएंगे। चुनाव अधिकारी उम्मीदवारों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे अद्यतन नामांकन फॉर्म की जाँच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करें।
स्थानीय NGOs और राजनीतिक दलों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया, यह मानते हुए कि इससे अधिक विविध उम्मीदवारों का समूह तैयार होगा और गांव स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।
भारत निर्वाचन आयोग इस बदलाव की निगरानी करेगा ताकि शैक्षणिक योग्यता हटाने से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर कोई असर न पड़े।
अधिकारियों ने बताया कि यह परिवर्तन ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक शिक्षा के स्तर के कम होने के कारण उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए है। साथ ही, नामांकन फॉर्म में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर भी उम्मीदवारों को दिया जाएगा, इससे पहले कि अंतिम सूची प्रकाशित हो।
यह संशोधित दिशा-निर्देश आगामी पंचायती राज चुनावों पर लागू होंगे, जो इस वर्ष के बाद में आयोजित किए जाएंगे। चुनाव अधिकारी उम्मीदवारों से अनुरोध कर रहे हैं कि वे अद्यतन नामांकन फॉर्म की जाँच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा करें।
स्थानीय NGOs और राजनीतिक दलों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया, यह मानते हुए कि इससे अधिक विविध उम्मीदवारों का समूह तैयार होगा और गांव स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मजबूत होगा।
भारत निर्वाचन आयोग इस बदलाव की निगरानी करेगा ताकि शैक्षणिक योग्यता हटाने से चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर कोई असर न पड़े।