📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Balisuraj
टेक्नोलॉजी
राजस्थान पुलिस ने बीपीआरएंडडी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर, नौ जिलों में हाई‑टेक बीट पुलिसिंग शुरू
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 05 अक्टू. 2026, 10:00 PM
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राजस्थान पुलिस और गृह मंत्रालय के बीपीआरएंडडी ने जयपुर में एमओयू पर हस्ताक्षर कर नौ जिलों में तकनीक‑सक्षम बीट पुलिसिंग शुरू करने का फैसला किया।
जयपुर – राजस्थान पुलिस और गृह मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य पुलिस मुख्यालय में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर हाई‑टेक बीट पुलिसिंग के लिए सहयोग को औपचारिक रूप दिया। यह समझौता पारंपरिक बीट पुलिसिंग को डिजिटल उपकरणों और डेटा‑आधारित निगरानी से सशक्त बनाने की दिशा में पहला कदम है।
एमओयू का उद्देश्य तकनीक‑सक्षम, जवाबदेह और जनोन्मुखी पुलिसिंग मॉडल स्थापित करना है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन, रीयल‑टाइम डेटा और नागरिक प्रतिक्रिया को शामिल किया जाएगा। दोनों पक्षों ने कहा कि इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार पुलिस की उपस्थिति अधिक प्रभावी होगी।
पहले चरण में राजस्थान के नौ जिलों में यह प्रणाली लागू की जाएगी। इन जिलों को जीपीएस‑सक्षम उपकरण, मोबाइल रिपोर्टिंग ऐप और एकीकृत डैशबोर्ड जैसे उन्नत साधन प्रदान किए जाएंगे, जिससे वरिष्ठ अधिकारी गश्त गतिविधियों और प्रतिक्रिया समय को रीयल‑टाइम में ट्रैक कर सकेंगे। इस तकनीकी बदलाव के साथ पुलिस कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से कानून व्यवस्था में सुधार, प्रतिक्रिया अंतराल में कमी और सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि होगी, क्योंकि पुलिस की कार्यवाही अधिक पारदर्शी होगी। प्रदर्शन के आधार पर इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित करने की संभावना है।
एमओयू का उद्देश्य तकनीक‑सक्षम, जवाबदेह और जनोन्मुखी पुलिसिंग मॉडल स्थापित करना है, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन, रीयल‑टाइम डेटा और नागरिक प्रतिक्रिया को शामिल किया जाएगा। दोनों पक्षों ने कहा कि इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार पुलिस की उपस्थिति अधिक प्रभावी होगी।
पहले चरण में राजस्थान के नौ जिलों में यह प्रणाली लागू की जाएगी। इन जिलों को जीपीएस‑सक्षम उपकरण, मोबाइल रिपोर्टिंग ऐप और एकीकृत डैशबोर्ड जैसे उन्नत साधन प्रदान किए जाएंगे, जिससे वरिष्ठ अधिकारी गश्त गतिविधियों और प्रतिक्रिया समय को रीयल‑टाइम में ट्रैक कर सकेंगे। इस तकनीकी बदलाव के साथ पुलिस कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से कानून व्यवस्था में सुधार, प्रतिक्रिया अंतराल में कमी और सार्वजनिक विश्वास में वृद्धि होगी, क्योंकि पुलिस की कार्यवाही अधिक पारदर्शी होगी। प्रदर्शन के आधार पर इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तारित करने की संभावना है।