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अपराध
राजस्थान हाईकोर्ट ने 51 लाख के बैंक घोटाले को उजागर करने वाले पूर्व एसबीआई प्रबंधक पर कार्रवाई रद्द की
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 31 अक्टू. 2026, 05:32 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने पहले की कार्रवाई की सिफारिश को रद्द कर दिया है, जिसमें भिवाड़ी शाखा के पूर्व प्रबंधक विवेक शर्मा, जिन्होंने 51 लाख रुपये के नकली आवास ऋण को उजागर किया था, शामिल थे।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व एसबीआई भिवाड़ी शाखा प्रबंधक विवेक शर्मा के खिलाफ शुरू होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश को निरस्त कर दिया है। शर्मा ने 51 लाख रुपये के नकली आवास ऋण को उजागर किया था, जिससे बैंक की ऋण प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच शुरू हुई।
कोर्ट के इस आदेश से शर्मा को किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से मुक्त किया गया है और वह इस घोटाले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहे हैं। इसी समय एंटी‑करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर रिश्वत की माँग करने का मामला दर्ज किया है, जो उसी धोखाधड़ी से जुड़े माने जा रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय कदाचार में व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जबकि घोटाले की पूरी सीमा की जांच जारी है।
एसबीआई भिवाड़ी शाखा को अब भी जांच के दायरे में रखा गया है और वरिष्ठ कर्मचारियों में संभावित भ्रष्टाचार की सीमा तय करने के लिए आगे की पूछताछ की उम्मीद है।
शर्मा के खिलाफ कोई अतिरिक्त दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है, और हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके लिए महत्वपूर्ण राहत का संकेत है।
कोर्ट के इस आदेश से शर्मा को किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई से मुक्त किया गया है और वह इस घोटाले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहे हैं। इसी समय एंटी‑करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर रिश्वत की माँग करने का मामला दर्ज किया है, जो उसी धोखाधड़ी से जुड़े माने जा रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय कदाचार में व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जबकि घोटाले की पूरी सीमा की जांच जारी है।
एसबीआई भिवाड़ी शाखा को अब भी जांच के दायरे में रखा गया है और वरिष्ठ कर्मचारियों में संभावित भ्रष्टाचार की सीमा तय करने के लिए आगे की पूछताछ की उम्मीद है।
शर्मा के खिलाफ कोई अतिरिक्त दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है, और हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके लिए महत्वपूर्ण राहत का संकेत है।