📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
अपराध
राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक रिट याचिकाओं को अलग फाइल करने की व्यवस्था बहाल की
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 03 नव. 2026, 03:31 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 के फैसले को पलटते हुए आपराधिक रिट याचिकाओं को अलग "क्रिमिनल रिट पिटीशन" के रूप में दर्ज करने की पुरानी प्रक्रिया को फिर से लागू किया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 के उस आदेश को उलट दिया, जिसमें आपराधिक रिट याचिकाओं को सामान्य रिट के साथ फाइल करने का निर्देश था। अब अदालत ने पूर्व की प्रथा को दोबारा लागू किया, जिसमें आपराधिक मामलों की याचिकाओं को अलग "क्रिमिनल रिट पिटीशन" के रूप में दर्ज किया जाएगा।
बेंच ने यह निर्णय प्रक्रियात्मक असंगतियों को देखते हुए लिया, क्योंकि आपराधिक और दीवानी रिट याचिकाओं को एक साथ मानने से मामलों के प्रबंधन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं। न्यायाधीशों ने कहा कि आपराधिक मामलों को विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता है, जिससे न्यायिक जांच समय पर और उचित रूप से हो सके।
वकीलों ने इस स्पष्टता का स्वागत किया, यह कहते हुए कि अलग फाइलिंग प्रणाली से फाइलिंग में भ्रम कम होगा और वादी बिना procedural बाधाओं के आपराधिक रिट याचिकाएँ दायर कर सकेंगे। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यह बदलाव सभी बेंचों में तुरंत लागू किया जाए।
यह निर्णय किसी भी चल रही आपराधिक रिट याचिका के मूल पक्ष को नहीं बदलता, केवल फाइलिंग के स्वरूप को बदलता है। अदालत ने निचली अदालतों और रजिस्ट्री कर्मचारियों को अपने रजिस्टर को अपडेट करने का निर्देश दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राजस्थान में आपराधिक न्याय व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रथा के अनुरूप है।
बेंच ने यह निर्णय प्रक्रियात्मक असंगतियों को देखते हुए लिया, क्योंकि आपराधिक और दीवानी रिट याचिकाओं को एक साथ मानने से मामलों के प्रबंधन में कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही थीं। न्यायाधीशों ने कहा कि आपराधिक मामलों को विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता है, जिससे न्यायिक जांच समय पर और उचित रूप से हो सके।
वकीलों ने इस स्पष्टता का स्वागत किया, यह कहते हुए कि अलग फाइलिंग प्रणाली से फाइलिंग में भ्रम कम होगा और वादी बिना procedural बाधाओं के आपराधिक रिट याचिकाएँ दायर कर सकेंगे। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि यह बदलाव सभी बेंचों में तुरंत लागू किया जाए।
यह निर्णय किसी भी चल रही आपराधिक रिट याचिका के मूल पक्ष को नहीं बदलता, केवल फाइलिंग के स्वरूप को बदलता है। अदालत ने निचली अदालतों और रजिस्ट्री कर्मचारियों को अपने रजिस्टर को अपडेट करने का निर्देश दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राजस्थान में आपराधिक न्याय व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो लंबे समय से चली आ रही न्यायिक प्रथा के अनुरूप है।