📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shiraz Husain
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राजस्थान हाईकोर्ट ने गैर‑आरएएस अधिकारियों की आईएएस पदोन्नति पर 15 दिन में फैसला करने का आदेश
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 03 नव. 2026, 09:45 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को गैर‑आरएएस अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नत करने के मुद्दे पर 15 दिनों के भीतर कारणयुक्त निर्णय देने का निर्देश दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में गैर‑आरएएस अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नत करने के संबंध में राज्य सरकार को कड़ा आदेश दिया है। अदालत ने सरकार को पंद्रह दिनों के भीतर कारणयुक्त निर्णय प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिससे पारदर्शिता और वैधानिक मानदंडों का पालन सुनिश्चित हो सके।
यह आदेश तब आया है जब यह चिंता बढ़ रही थी कि नियमित प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के बाहर के अधिकारियों को पदोन्नत करने से वरिष्ठता और योग्यता के मानदंडों को दरकिनार किया जा सकता है। समय सीमा निर्धारित कर न्यायपालिका यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसे पदोन्नतियों को कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार पर उचित ठहराया जाए।
राज्य सरकार को अब अपने चयन मानदंड, गैर‑आरएएस अधिकारियों को पदोन्नत करने के कारण और सेवा नियमों के अनुपालन को स्पष्ट करना होगा। यदि यह निर्देश नहीं माना गया तो आगे की न्यायिक कार्रवाई संभव है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश नागरिक सेवा नियुक्तियों की निगरानी में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है और आईएएस की योग्यता‑आधारित संरचना की सुरक्षा करता है। यह निर्णय अन्य राज्यों में समान पदोन्नति मामलों को भी प्रभावित कर सकता है।
यह आदेश तब आया है जब यह चिंता बढ़ रही थी कि नियमित प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के बाहर के अधिकारियों को पदोन्नत करने से वरिष्ठता और योग्यता के मानदंडों को दरकिनार किया जा सकता है। समय सीमा निर्धारित कर न्यायपालिका यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ऐसे पदोन्नतियों को कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार पर उचित ठहराया जाए।
राज्य सरकार को अब अपने चयन मानदंड, गैर‑आरएएस अधिकारियों को पदोन्नत करने के कारण और सेवा नियमों के अनुपालन को स्पष्ट करना होगा। यदि यह निर्देश नहीं माना गया तो आगे की न्यायिक कार्रवाई संभव है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश नागरिक सेवा नियुक्तियों की निगरानी में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है और आईएएस की योग्यता‑आधारित संरचना की सुरक्षा करता है। यह निर्णय अन्य राज्यों में समान पदोन्नति मामलों को भी प्रभावित कर सकता है।