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राजनीति
रajasthan उच्च न्यायालय ने 2011 की भूमि अधिग्रहण आदेश को रद्द किया, कानूनी समयसीमा का उल्लंघन
✍️ Live Law
🗓 04 अग. 2026, 01:03 PM
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रajasthan उच्च न्यायालय ने 2011 के भूमि अधिग्रहण आदेश को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए कानूनी समयसीमा को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
रajasthan उच्च न्यायालय ने आज 2011 में जारी भूमि अधिग्रहण आदेश को रद्द कर दिया, यह कहते हुए कि कानूनी समयसीमा का पालन न करने पर सार्वजनिक उद्देश्य भी कानून के ऊपर नहीं हो सकता।
न्यायालय ने पाया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में रajasthan भूमि अधिग्रहण अधिनियम द्वारा निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया, जिसमें नोटिस, सुनवाई और अनुमोदन के लिए विशिष्ट अवधि का प्रावधान है। इस प्रक्रिया के उल्लंघन के कारण अधिग्रहण अवैध माना गया।
यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि भूमि अधिग्रहण मामलों में प्रक्रियात्मक अनुपालन अनिवार्य है और अदालतें किसी भी विचलन पर कड़ी नजर रखेंगी। यह राज्य प्राधिकरणों को यह चेतावनी देता है कि तात्कालिकता के बहाने कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि न्यायालय ने अधिग्रहण के लिए प्रयुक्त परियोजना का विवरण नहीं दिया, यह फैसला भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा और शासन में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए कानूनी सुरक्षा के महत्व को दोहराता है।
न्यायालय ने पाया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में रajasthan भूमि अधिग्रहण अधिनियम द्वारा निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया, जिसमें नोटिस, सुनवाई और अनुमोदन के लिए विशिष्ट अवधि का प्रावधान है। इस प्रक्रिया के उल्लंघन के कारण अधिग्रहण अवैध माना गया।
यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि भूमि अधिग्रहण मामलों में प्रक्रियात्मक अनुपालन अनिवार्य है और अदालतें किसी भी विचलन पर कड़ी नजर रखेंगी। यह राज्य प्राधिकरणों को यह चेतावनी देता है कि तात्कालिकता के बहाने कानूनी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि न्यायालय ने अधिग्रहण के लिए प्रयुक्त परियोजना का विवरण नहीं दिया, यह फैसला भूमि मालिकों के अधिकारों की रक्षा और शासन में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए कानूनी सुरक्षा के महत्व को दोहराता है।