📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown authorUnknown author probably Umrao Singh
राजनीति
राजस्थान फैमिली कोर्ट ने पूर्व विधायक अमृता मेघवाल के तलाक के एकतरफा डिक्री को रद्द किया
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 24 अग. 2026, 08:51 AM
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जालोर के फैमिली कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक अमृता मेघवाल के तीन साल पुराने तलाक के एकतरफा डिक्री को रद्द कर नई सुनवाई का आदेश दिया।
जालोर, राजस्थान के फैमिली कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक अमृता मेघवाल और भाजपा एससी मोर्चा जिलाध्यक्ष बाबूलाल मेघवाल के तलाक के मामले में तीन साल पहले जारी एकतरफा डिक्री को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अमृता मेघवाल को अपने पक्ष को उचित रूप से रखने का अवसर नहीं दिया गया था।
इस आदेश के अनुसार पूर्व डिक्री निरस्त हो गई है और अब दोनों पक्षों को समान अवसर देते हुए मामले की नई सुनवाई होगी। यह निर्णय पारिवारिक कानून में प्रक्रिया की निष्पक्षता को रेखांकित करता है, चाहे मामले में राजनीतिक शख्सियतें शामिल हों।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह उलटफेर तलाक के मूल मुद्दे पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया में हुई चूक पर आधारित है। अगली सुनवाई की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है, और कोर्ट सामान्य प्रक्रिया के अनुसार इसे निर्धारित करेगा।
यह विकास सार्वजनिक ध्यान का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि अमृता मेघवाल पहले राजस्थान विधानसभा की सदस्य रही हैं। दोनों पक्षों ने वकीलों को नियुक्त किया है और अब मामला सामान्य फैमिली कोर्ट की कार्यवाही के तहत आगे बढ़ेगा।
कोर्ट का यह हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका सभी को, उनकी राजनीतिक स्थिति चाहे कुछ भी हो, कानूनी अधिकारों की रक्षा करने में तत्पर है, और यह समान प्रक्रिया की मांग करने वाले अन्य मामलों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
इस आदेश के अनुसार पूर्व डिक्री निरस्त हो गई है और अब दोनों पक्षों को समान अवसर देते हुए मामले की नई सुनवाई होगी। यह निर्णय पारिवारिक कानून में प्रक्रिया की निष्पक्षता को रेखांकित करता है, चाहे मामले में राजनीतिक शख्सियतें शामिल हों।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह उलटफेर तलाक के मूल मुद्दे पर नहीं, बल्कि प्रक्रिया में हुई चूक पर आधारित है। अगली सुनवाई की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है, और कोर्ट सामान्य प्रक्रिया के अनुसार इसे निर्धारित करेगा।
यह विकास सार्वजनिक ध्यान का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि अमृता मेघवाल पहले राजस्थान विधानसभा की सदस्य रही हैं। दोनों पक्षों ने वकीलों को नियुक्त किया है और अब मामला सामान्य फैमिली कोर्ट की कार्यवाही के तहत आगे बढ़ेगा।
कोर्ट का यह हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि न्यायपालिका सभी को, उनकी राजनीतिक स्थिति चाहे कुछ भी हो, कानूनी अधिकारों की रक्षा करने में तत्पर है, और यह समान प्रक्रिया की मांग करने वाले अन्य मामलों के लिए भी एक मिसाल स्थापित कर सकता है।