📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / GujLitFest
धर्म
राजस्थान के सीए ने त्यागा पेशा, दिल्ली के लाल किले में दिगंबर मुनि बनें अंकित जैन
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 28 अक्टू. 2026, 04:15 PM
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राष्ट्रपति अचनारा, राजस्थान के 32 साल के अंकित जैन ने पेशा छोड़कर दिल्ली के लाल किले में दिगंबर मुनि दीक्षा ली।
दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित एक पवित्र समारोह में, प्रतापगढ़ जिले के अचनारा गांव के 32 वर्षीय अंकित जैन ने दिगंबर मुनि के रूप में आध्यात्मिक जीवन को अपनाया। वरिष्ठ दिगंबर साधुओं की उपस्थिति में दीक्षा ली गई, जिससे उनका सांसारिक पेशा समाप्त हो गया।
जैन ने पहले चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई पूरी की थी और वित्तीय क्षेत्र में करियर बना रहे थे। गहरी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उन्होंने अपने पेशेवर रास्ते को त्याग कर जैन धर्म के वैराग्य मार्ग को चुना, जिससे उनके सहकर्मी और मित्र आश्चर्यचकित रहे।
दीक्षा समारोह में पारम्परिक अनुष्ठान हुए, जिसमें सांसारिक बंधनों को त्यागने और श्वेत वस्त्र धारण करने की प्रक्रिया शामिल थी। वरिष्ठ मुनियों ने पवित्र श्लोकों का पाठ किया और जैन को दिगंबर मुनियों की विशिष्ट वस्त्रधारण और साधुता का प्रतीक प्रदान किया गया।
परिवार और गांव के लोगों ने इस निर्णय पर गर्व और उदासी दोनों व्यक्त की। उन्होंने जैन की दृढ़ संकल्प की सराहना की, साथ ही एक उज्ज्वल पेशेवर को खोने का दुःख भी जताया। स्थानीय नेताओं ने कहा कि यह परिवर्तन आज के शिक्षित युवाओं में आध्यात्मिक खोज की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
अंकित जैन का कदम उन युवा पेशेवरों में से एक है जो भौतिक सफलता से परे अर्थ की तलाश में वैराग्य मार्ग अपनाते हैं, जो भारतीय समाज में एक नई दिशा का संकेत देता है।
जैन ने पहले चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई पूरी की थी और वित्तीय क्षेत्र में करियर बना रहे थे। गहरी आध्यात्मिक प्रवृत्ति के कारण उन्होंने अपने पेशेवर रास्ते को त्याग कर जैन धर्म के वैराग्य मार्ग को चुना, जिससे उनके सहकर्मी और मित्र आश्चर्यचकित रहे।
दीक्षा समारोह में पारम्परिक अनुष्ठान हुए, जिसमें सांसारिक बंधनों को त्यागने और श्वेत वस्त्र धारण करने की प्रक्रिया शामिल थी। वरिष्ठ मुनियों ने पवित्र श्लोकों का पाठ किया और जैन को दिगंबर मुनियों की विशिष्ट वस्त्रधारण और साधुता का प्रतीक प्रदान किया गया।
परिवार और गांव के लोगों ने इस निर्णय पर गर्व और उदासी दोनों व्यक्त की। उन्होंने जैन की दृढ़ संकल्प की सराहना की, साथ ही एक उज्ज्वल पेशेवर को खोने का दुःख भी जताया। स्थानीय नेताओं ने कहा कि यह परिवर्तन आज के शिक्षित युवाओं में आध्यात्मिक खोज की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
अंकित जैन का कदम उन युवा पेशेवरों में से एक है जो भौतिक सफलता से परे अर्थ की तलाश में वैराग्य मार्ग अपनाते हैं, जो भारतीय समाज में एक नई दिशा का संकेत देता है।