📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tuian Times
राजनीति
राजस्थान विधानसभा गिनती: सीटों में बीजेपी आगे, वोटों में कांग्रेस की टक्कर, निर्दलीयों पर नजर
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 15 सित. 2026, 01:36 PM
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राजस्थान विधानसभा चुनाव की गिनती में बीजेपी सीटों में आगे, कांग्रेस वोटों में करीब, अब निर्दलीयों पर बढ़ा ध्यान।
राजस्थान विधानसभा चुनाव की गिनती चल रही है, और शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अब तक जीती गई सीटों में बढ़त बना ली है। जबकि कुल गिनती अभी पूरी नहीं हुई, प्रमुख कई निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी की सीटों की बढ़त स्पष्ट दिख रही है।
बीजेपी की सीटों की बढ़त के बावजूद, कांग्रेस ने वोट प्रतिशत में बहुत करीब रहने का संकेत दिया है। कांग्रेस का वोट शेयर बीजेपी के बहुत नज़दीक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव बहुत प्रतिस्पर्धी रहा है और अंतिम परिणाम अभी बदल भी सकता है।
दोनों बड़े दलों के बीच कड़ी लड़ाई देखते हुए, अब राजनीतिक विश्लेषक निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर ध्यान दे रहे हैं। कई ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में जहाँ बीजेपी और कांग्रेस के बीच अंतर न्यूनतम है, वहाँ निर्दलीयों के पास जीतने या समर्थन देने की शक्ति है, जो राज्य सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यदि कोई दल अतिरिक्त समर्थन नहीं जुटा पाता, तो असंतुलित विधानसभा का जोखिम बना रहता है। इस कारण, निर्दलीयों के post‑count गठबंधन को लेकर सभी आँखें टिकी हुई हैं, क्योंकि उनका निर्णय राजस्थान के अगले विधायी कार्यकाल की दिशा तय कर सकता है।
बीजेपी की सीटों की बढ़त के बावजूद, कांग्रेस ने वोट प्रतिशत में बहुत करीब रहने का संकेत दिया है। कांग्रेस का वोट शेयर बीजेपी के बहुत नज़दीक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनाव बहुत प्रतिस्पर्धी रहा है और अंतिम परिणाम अभी बदल भी सकता है।
दोनों बड़े दलों के बीच कड़ी लड़ाई देखते हुए, अब राजनीतिक विश्लेषक निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर ध्यान दे रहे हैं। कई ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में जहाँ बीजेपी और कांग्रेस के बीच अंतर न्यूनतम है, वहाँ निर्दलीयों के पास जीतने या समर्थन देने की शक्ति है, जो राज्य सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यदि कोई दल अतिरिक्त समर्थन नहीं जुटा पाता, तो असंतुलित विधानसभा का जोखिम बना रहता है। इस कारण, निर्दलीयों के post‑count गठबंधन को लेकर सभी आँखें टिकी हुई हैं, क्योंकि उनका निर्णय राजस्थान के अगले विधायी कार्यकाल की दिशा तय कर सकता है।