📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Suyash Dwivedi
देश
बिलासपुर दुर्घटना के एक साल बाद भी रेलवे ने शराब परीक्षण नियमों पर कोई स्पष्टता नहीं दी
✍️ Business Standard
🗓 25 अक्टू. 2026, 03:36 AM
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बिलासपुर में हुई ट्रेन दुर्घटना के एक साल बाद भी भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों के लिए शराब परीक्षण के नियमों को स्पष्ट नहीं किया, जिससे स्पष्टता की मांग बढ़ी है।
भारतीय रेलवे मंत्रालय ने अभी तक रेलवे कर्मचारियों के लिए शराब परीक्षण के स्पष्ट नियम जारी नहीं किए हैं, जबकि बिलासपुर में हुई घातक दुर्घटना के एक साल बाद इस मुद्दे पर दबाव बढ़ रहा है। यह दुर्घटना, जिसमें कई जानें गईं, ने रेलवे सुरक्षा में शराब के प्रभाव को लेकर बहस को फिर से उजागर किया।
रेलवे यूनियन और सुरक्षा संगठनों सहित कई पक्षों ने अधिकारियों से परीक्षण प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने और सभी ऑपरेशनल स्टाफ को प्रोटोकॉल बताने की बार‑बार मांग की है। फिर भी, रेलवे मंत्रालय की आधिकारिक टिप्पणी सीमित रही है और नियमों के जारी होने की कोई निश्चित तिथि नहीं बताई गई है।
स्पष्टता की कमी ने यात्रियों और वकालत समूहों में चिंता बढ़ा दी है, जो मानते हैं कि पारदर्शी परीक्षण मानक सार्वजनिक विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं। बिलासपुर त्रासदी की वर्षगाँठ के निकट आते ही, रेलवे बोर्ड को अपनी सुरक्षा निगरानी तंत्र पर बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा नीतियों की व्यापक समीक्षा चल रही है, लेकिन प्रस्तावित ढाँचे के विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। जब तक ये नियम औपचारिक रूप से घोषित नहीं होते, यह मुद्दा सार्वजनिक और मीडिया की प्रमुख चर्चा बन रहेगा।
यह स्थिति भारत के विशाल रेल नेटवर्क में निरंतर सुरक्षा उपायों को लागू करने की व्यापक चुनौतियों को दर्शाती है, जहाँ संचालन की जटिलताओं के कारण नीति कार्यान्वयन अक्सर विलंबित हो जाता है।
रेलवे यूनियन और सुरक्षा संगठनों सहित कई पक्षों ने अधिकारियों से परीक्षण प्रक्रियाओं को मानकीकृत करने और सभी ऑपरेशनल स्टाफ को प्रोटोकॉल बताने की बार‑बार मांग की है। फिर भी, रेलवे मंत्रालय की आधिकारिक टिप्पणी सीमित रही है और नियमों के जारी होने की कोई निश्चित तिथि नहीं बताई गई है।
स्पष्टता की कमी ने यात्रियों और वकालत समूहों में चिंता बढ़ा दी है, जो मानते हैं कि पारदर्शी परीक्षण मानक सार्वजनिक विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं। बिलासपुर त्रासदी की वर्षगाँठ के निकट आते ही, रेलवे बोर्ड को अपनी सुरक्षा निगरानी तंत्र पर बढ़ती जांच का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा नीतियों की व्यापक समीक्षा चल रही है, लेकिन प्रस्तावित ढाँचे के विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। जब तक ये नियम औपचारिक रूप से घोषित नहीं होते, यह मुद्दा सार्वजनिक और मीडिया की प्रमुख चर्चा बन रहेगा।
यह स्थिति भारत के विशाल रेल नेटवर्क में निरंतर सुरक्षा उपायों को लागू करने की व्यापक चुनौतियों को दर्शाती है, जहाँ संचालन की जटिलताओं के कारण नीति कार्यान्वयन अक्सर विलंबित हो जाता है।