📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Dheerajj.12
टेक्नोलॉजी
बिहार के समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों के लिए रेलवे ने 233 करोड़ रुपये इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग को मंजूरी दी
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 01 सित. 2026, 07:03 PM
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भारतीय रेलवे ने बिहार के समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदलने के लिये 233 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है।
भारतीय रेलवे ने पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से बदलने के लिये 233 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इस परियोजना के तहत पुराने पैनल‑आधारित सिग्नलिंग को कंप्यूटर‑आधारित इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से प्रतिस्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रेन रूटिंग तेज़ और सुरक्षा में सुधार होगा।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग ट्रैक स्विच और सिग्नल को स्वचालित रूप से नियंत्रित करता है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है और ट्रैक क्षमता बढ़ती है। यह कदम भारतीय रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य प्रमुख मार्गों पर समयबद्धता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का कार्यान्वयन रेलवे इंजीनियरिंग विभाग की देखरेख में होगा और निकट भविष्य में शुरू होने की उम्मीद है। पूर्ण होने पर इन स्टेशनों पर संचालन अधिक विश्वसनीय होगा और सिग्नल फेल्योर की संभावनाएँ घटेंगी।
यह निवेश बिहार में बुनियादी ढाँचे के विकास को तेज़ करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के सरकारी लक्ष्य के साथ मेल खाता है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
स्थानीय यात्रियों और माल परिवहन करने वाले उद्यमियों को नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के लागू होने पर सुगम यात्रा और कम देरी का लाभ मिलने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग ट्रैक स्विच और सिग्नल को स्वचालित रूप से नियंत्रित करता है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है और ट्रैक क्षमता बढ़ती है। यह कदम भारतीय रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य प्रमुख मार्गों पर समयबद्धता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का कार्यान्वयन रेलवे इंजीनियरिंग विभाग की देखरेख में होगा और निकट भविष्य में शुरू होने की उम्मीद है। पूर्ण होने पर इन स्टेशनों पर संचालन अधिक विश्वसनीय होगा और सिग्नल फेल्योर की संभावनाएँ घटेंगी।
यह निवेश बिहार में बुनियादी ढाँचे के विकास को तेज़ करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के सरकारी लक्ष्य के साथ मेल खाता है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
स्थानीय यात्रियों और माल परिवहन करने वाले उद्यमियों को नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली के लागू होने पर सुगम यात्रा और कम देरी का लाभ मिलने की उम्मीद है।