📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Himanshu Arya Khowal
राजनीति
राहुल गांधी ने एमपी के सीएम मोहन यादव से 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने का आग्रह, 13% होल्ड पदों की नियुक्ति का इंतजार
✍️ Amar Ujala · Bhopal
🗓 23 सित. 2026, 10:15 PM
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव को 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग की है, साथ ही 87:13 व्यवस्था के तहत 13% होल्ड पदों की 2022 से नियुक्ति न हो पाने की ओर इशारा किया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित एक औपचारिक पत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने राज्य में 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग दोहराई। स्थानीय मीडिया को प्राप्त इस पत्र में आरक्षण को तुरंत कार्यान्वित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।
गांधी ने बताया कि 87:13 व्यवस्था के तहत कुल पदों में से 13% ओबीसी उम्मीदवारों के लिए "होल्ड" पद के रूप में निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों में से कई 2022 से खाली पड़े हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को अनिश्चितकालीन प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
यह अपील कांग्रेस द्वारा आगामी चुनावी माहौल में राज्य सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि वे तर्क देते हैं कि नियुक्तियों में देरी सामाजिक न्याय के सिद्धांत को कमजोर करती है। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पत्र मध्य प्रदेश में शासकीय खामियों को उजागर करने के लिए विपक्ष की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, विशेषकर आरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन के संदर्भ में।
आगे आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीतिक बहस तेज़ होने की संभावना है, जहाँ दोनों पक्ष आरक्षण के कार्यान्वयन समय‑सीमा और चयन मानदंडों पर चर्चा करेंगे।
गांधी ने बताया कि 87:13 व्यवस्था के तहत कुल पदों में से 13% ओबीसी उम्मीदवारों के लिए "होल्ड" पद के रूप में निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों में से कई 2022 से खाली पड़े हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों को अनिश्चितकालीन प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
यह अपील कांग्रेस द्वारा आगामी चुनावी माहौल में राज्य सरकार पर दबाव बनाने के प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि वे तर्क देते हैं कि नियुक्तियों में देरी सामाजिक न्याय के सिद्धांत को कमजोर करती है। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पत्र मध्य प्रदेश में शासकीय खामियों को उजागर करने के लिए विपक्ष की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, विशेषकर आरक्षण नीतियों के कार्यान्वयन के संदर्भ में।
आगे आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीतिक बहस तेज़ होने की संभावना है, जहाँ दोनों पक्ष आरक्षण के कार्यान्वयन समय‑सीमा और चयन मानदंडों पर चर्चा करेंगे।