📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Van1905
देश
असम‑मेघालय सीमा तनाव में RAF और CRPF ने झंडा मार्च किया
✍️ The Economic Times
🗓 23 अग. 2026, 02:03 AM
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राष्ट्रवादी आवाज़ फोर्स और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल ने असम‑मेघालय सीमा पर झंडा मार्च किया, जबकि विरोध जारी है और पर्यटन प्रभावित हुआ।
नई दिल्ली – सोमवार को राष्ट्रवादी आवाज़ फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) ने असम‑मेघालय सीमा के विवादित हिस्से में समन्वित झंडा मार्च किया। यह प्रदर्शन प्रशासनिक नियंत्रण को दर्शाने के उद्देश्य से किया गया, जबकि सीमा विवाद के पुनरुत्थान के बाद से स्थानीय विरोध जारी है।
सीमा के दोनों ओर के गाँवों के निवासियों ने encroachment को लेकर विरोध जताते हुए नारे लगाए और सड़कें बंद कर दीं। इस कारण निकटवर्ती पर्यटन स्थलों, जैसे पहाड़ी रिसॉर्ट और वन्यजीव अभयारण्य, में यात्रियों के प्रवास में बाधा आई है।
कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने बताया कि मार्च के दौरान बड़े पैमाने पर कोई घटना नहीं हुई, पर सीमा चौकी के पास कुछ छोटे झड़पें दर्ज की गईं। RAF और CRPF के जवान राष्ट्रीय ध्वज लेकर मानक दंगा नियंत्रण उपकरण पहने हुए थे, जो एकता का प्रतीक था।
असम और मेघालय की राज्य सरकारें स्थिति को शांत करने के लिए वार्ता कर रही हैं, पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। पर्यटन विभाग ने यात्रियों को सलाह दी है कि प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से पहले स्थानीय सलाहकारियों पर ध्यान दें।
झंडा मार्च उत्तरपूर्व में अंतर-राज्यीय सीमा मुद्दों की संवेदनशीलता को उजागर करता है, जहाँ ऐतिहासिक दावे और स्थानीय भावनाएँ सुरक्षा पहलुओं के साथ अक्सर टकराती हैं।
सीमा के दोनों ओर के गाँवों के निवासियों ने encroachment को लेकर विरोध जताते हुए नारे लगाए और सड़कें बंद कर दीं। इस कारण निकटवर्ती पर्यटन स्थलों, जैसे पहाड़ी रिसॉर्ट और वन्यजीव अभयारण्य, में यात्रियों के प्रवास में बाधा आई है।
कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने बताया कि मार्च के दौरान बड़े पैमाने पर कोई घटना नहीं हुई, पर सीमा चौकी के पास कुछ छोटे झड़पें दर्ज की गईं। RAF और CRPF के जवान राष्ट्रीय ध्वज लेकर मानक दंगा नियंत्रण उपकरण पहने हुए थे, जो एकता का प्रतीक था।
असम और मेघालय की राज्य सरकारें स्थिति को शांत करने के लिए वार्ता कर रही हैं, पर अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। पर्यटन विभाग ने यात्रियों को सलाह दी है कि प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से पहले स्थानीय सलाहकारियों पर ध्यान दें।
झंडा मार्च उत्तरपूर्व में अंतर-राज्यीय सीमा मुद्दों की संवेदनशीलता को उजागर करता है, जहाँ ऐतिहासिक दावे और स्थानीय भावनाएँ सुरक्षा पहलुओं के साथ अक्सर टकराती हैं।