📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
धर्म
सेहोर के कुबेरेश्वरधाम में राधाष्टमी: चांदी के कलशों से हुआ राधा‑कृष्ण महाभिषेक
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 19 सित. 2026, 08:31 PM
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राधाष्टमी पर सेहोर के कुबेरेश्वरधाम में रत्नजड़ित राधा‑कृष्ण की प्रतिमा को 56 भोग अर्पित कर चांदी के कलशों से महाभिषेक किया गया, जिससे बड़ी संख्या में भक्त जुटे।
सेहोर के कुबेरेश्वरधाम में राधाष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लेकर इस पावन समारोह को गौरवशाली बनाया। मंदिर के मुख्य गर्भ में राधा‑कृष्ण की प्रतिमा को रत्नजड़ित श्रृंगार में सजा कर प्रस्तुत किया गया, जो उत्सव की भव्यता को दर्शाता है।
पुजारीजी ने 56 भोग क्रमशः अर्पित किए, प्रत्येक प्रसाद को विशेष विधि से प्रस्तुत किया गया। अंतिम भोग के बाद “राधा” का जयकारा पूरे परिसर में गूँज उठा, जिससे श्रद्धा की लहर और तीव्र हो गई।
समारोह का मुख्य आकर्षण चांदी के कलशों से किया गया महाभिषेक था। पवित्र जल से भरे इन कलशों को राधा‑कृष्ण की प्रतिमा पर धीरे‑धीरे डाला गया, जिससे उपस्थित सभी भक्तों ने गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
भक्तों ने पारम्परिक वस्त्र धारण किए, भजन‑कीर्तन और तालियों के साथ इस पावन अवसर को मनाया। यह आयोजन मध्य प्रदेश में राधाष्टमी के धार्मिक महत्व को पुनः स्थापित करता है।
स्थानीय प्राधिकरणों ने बताया कि समारोह शांति एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जबकि मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण और अनुष्ठान की सुगमता के लिए विशेष व्यवस्था की।
पुजारीजी ने 56 भोग क्रमशः अर्पित किए, प्रत्येक प्रसाद को विशेष विधि से प्रस्तुत किया गया। अंतिम भोग के बाद “राधा” का जयकारा पूरे परिसर में गूँज उठा, जिससे श्रद्धा की लहर और तीव्र हो गई।
समारोह का मुख्य आकर्षण चांदी के कलशों से किया गया महाभिषेक था। पवित्र जल से भरे इन कलशों को राधा‑कृष्ण की प्रतिमा पर धीरे‑धीरे डाला गया, जिससे उपस्थित सभी भक्तों ने गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
भक्तों ने पारम्परिक वस्त्र धारण किए, भजन‑कीर्तन और तालियों के साथ इस पावन अवसर को मनाया। यह आयोजन मध्य प्रदेश में राधाष्टमी के धार्मिक महत्व को पुनः स्थापित करता है।
स्थानीय प्राधिकरणों ने बताया कि समारोह शांति एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जबकि मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण और अनुष्ठान की सुगमता के लिए विशेष व्यवस्था की।