📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / The Hermitage
स्वास्थ्य
पंजाब की नशा समस्या को चाहिए ठोस नीति, न कि नारे
✍️ The Indian Express
🗓 21 सित. 2026, 09:01 AM
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द इंडियन एक्सप्रेस के संपादकीय में पंजाब के अधिकारियों से नशा समस्या को सुलझाने के लिए नारे नहीं, बल्कि व्यापक नीति अपनाने की अपील की गई है, क्योंकि यह युवाओं पर गहरा असर डाल रहा है।
इंडियन एक्सप्रेस ने पंजाब में बढ़ते नशे की समस्या पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि केवल नारे नहीं, बल्कि एक ठोस और कार्यान्वित नीति की जरूरत है। लेख में बताया गया है कि कई सार्वजनिक बयानों के बावजूद, युवाओं में नशे की लत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे परिवारों और सामाजिक स्थिरता पर गहरा असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को सुलझाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं, कानून प्रवर्तन, शिक्षा और पुनर्वास क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। एक प्रभावी नीति में उपचार केंद्रों का विस्तार, नशे की आपूर्ति श्रृंखला की कड़ी निगरानी और सतही संदेशों से परे जागरूकता कार्यक्रम शामिल होने चाहिए।
अखबार पंजाब सरकार से अनुरोध करता है कि वह इस दिशा में विशेष संसाधन आवंटित करे, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करे और नागरिक समाज को समाधान तैयार करने में शामिल करे। केवल प्रतीकात्मक कदमों से इस समस्या को रोका नहीं जा सकता; ठोस कदम ही नशे के प्रकोप को रोक सकते हैं।
एनजीओ और चिकित्सा पेशेवरों ने लंबे समय से इस बहु‑आयामी दृष्टिकोण की वकालत की है, यह कहते हुए कि नारे केवल सतही होते हैं। लेख का निष्कर्ष यह है कि केवल निरंतर और नीति‑आधारित कार्रवाई ही पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को नशे के खतरे से बचा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को सुलझाने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं, कानून प्रवर्तन, शिक्षा और पुनर्वास क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। एक प्रभावी नीति में उपचार केंद्रों का विस्तार, नशे की आपूर्ति श्रृंखला की कड़ी निगरानी और सतही संदेशों से परे जागरूकता कार्यक्रम शामिल होने चाहिए।
अखबार पंजाब सरकार से अनुरोध करता है कि वह इस दिशा में विशेष संसाधन आवंटित करे, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करे और नागरिक समाज को समाधान तैयार करने में शामिल करे। केवल प्रतीकात्मक कदमों से इस समस्या को रोका नहीं जा सकता; ठोस कदम ही नशे के प्रकोप को रोक सकते हैं।
एनजीओ और चिकित्सा पेशेवरों ने लंबे समय से इस बहु‑आयामी दृष्टिकोण की वकालत की है, यह कहते हुए कि नारे केवल सतही होते हैं। लेख का निष्कर्ष यह है कि केवल निरंतर और नीति‑आधारित कार्रवाई ही पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को नशे के खतरे से बचा सकती है।