📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Unknown artist. Digitized by Davinder Singh Toor.
स्वास्थ्य
पंजाब में प्रोटीन‑समृद्ध खाद्य विविधता में लिंग अंतर हरियाणा व हिमाचल से अधिक
✍️ The Times of India
🗓 06 नव. 2026, 05:45 AM
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एक नवीन रिपोर्ट में पता चला कि प्रोटीन‑समृद्ध खाद्य विविधता में पुरुष‑महिला अंतर पंजाब में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की तुलना में अधिक है।
तीन उत्तर भारतीय राज्यों की आहार प्रवृत्तियों की तुलना करने वाले एक नवीन अध्ययन ने पंजाब में प्रोटीन‑समृद्ध खाद्य विविधता में लिंग अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। इस विश्लेषण से पता चलता है कि पंजाब में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में प्रोटीन स्रोतों की विविधता में कम पहुंच रखती हैं, और यह अंतर हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश में देखे गए अंतर से अधिक है।
घरेलू स्तर पर एकत्रित खाद्य‑आवृत्ति डेटा की जांच करने वाले इस रिपोर्ट में सांस्कृतिक और सामाजिक‑आर्थिक कारकों को महिलाओं की आहार पसंद पर प्रतिबंधित करने वाला बताया गया है। जबकि रिपोर्ट में सटीक आँकड़े नहीं दिए गए, यह पोषण संबंधी अंतर को पाटने के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में प्रोटीन विविधता में सुधार स्वास्थ्य परिणामों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर कृषि प्रधान इस क्षेत्र में। नीति निर्माताओं से अनुरोध किया गया है कि वे लिंग‑सेंसिटिव पोषण कार्यक्रमों को अपनाकर सभी को पोषक‑समृद्ध खाद्य पदार्थों तक समान पहुंच सुनिश्चित करें।
यह निष्कर्ष भारत में लिंग‑आधारित पोषण असमानताओं के बढ़ते चिंताओं में एक नया आयाम जोड़ता है और स्वास्थ्य, कृषि तथा सामाजिक कल्याण क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
घरेलू स्तर पर एकत्रित खाद्य‑आवृत्ति डेटा की जांच करने वाले इस रिपोर्ट में सांस्कृतिक और सामाजिक‑आर्थिक कारकों को महिलाओं की आहार पसंद पर प्रतिबंधित करने वाला बताया गया है। जबकि रिपोर्ट में सटीक आँकड़े नहीं दिए गए, यह पोषण संबंधी अंतर को पाटने के लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में प्रोटीन विविधता में सुधार स्वास्थ्य परिणामों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर कृषि प्रधान इस क्षेत्र में। नीति निर्माताओं से अनुरोध किया गया है कि वे लिंग‑सेंसिटिव पोषण कार्यक्रमों को अपनाकर सभी को पोषक‑समृद्ध खाद्य पदार्थों तक समान पहुंच सुनिश्चित करें।
यह निष्कर्ष भारत में लिंग‑आधारित पोषण असमानताओं के बढ़ते चिंताओं में एक नया आयाम जोड़ता है और स्वास्थ्य, कृषि तथा सामाजिक कल्याण क्षेत्रों के बीच समन्वित प्रयासों की मांग करता है।