📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Raakesh Blokhra
राजनीति
पंजाब हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के दावे को झूठा कहा, व्यक्तिगत पेशी का आदेश
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 06 अक्टू. 2026, 06:45 PM
👁 20
पंजाब हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के बयान को भ्रामक मानते हुए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया, साथ ही राज्य सरकार द्वारा दायर एसएलपी में रजिस्ट्री की खामियों को अभी तक ठीक न किए जाने की ओर इशारा किया।
पंजाब हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव द्वारा प्रस्तुत दावों को झूठा ठहराते हुए कोर्ट को भ्रामित करने का इरादा माना। न्यायालय ने कहा कि मुख्य सचिव ने गलत तथ्यों को पेश करके न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश की।
कोर्ट ने यह भी उजागर किया कि पंजाब सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में रजिस्ट्री द्वारा पहचानी गई खामियां अभी तक दूर नहीं हुई हैं। ये प्रक्रियात्मक त्रुटियां याचिका की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
इन तथ्यों को देखते हुए न्यायाधीश ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया, जिससे सीधे जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यह आदेश पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का निर्देश असामान्य है और यह दर्शाता है कि न्यायालय इस प्रकार के दुरुपयोग को गंभीरता से ले रहा है। आगामी सुनवाई में रजिस्ट्री की खामियों को दूर करने और याचिका को सभी प्रक्रियात्मक मानकों के अनुरूप बनाने पर चर्चा होगी।
यह मामला राज्य शासक अधिकारियों के न्यायालय के सामने जवाबदेह ठहराने के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, इसलिए इसे व्यापक रूप से देखा जा रहा है।
कोर्ट ने यह भी उजागर किया कि पंजाब सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में रजिस्ट्री द्वारा पहचानी गई खामियां अभी तक दूर नहीं हुई हैं। ये प्रक्रियात्मक त्रुटियां याचिका की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं।
इन तथ्यों को देखते हुए न्यायाधीश ने मुख्य सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया, जिससे सीधे जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यह आदेश पारदर्शिता और प्रक्रियात्मक नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का निर्देश असामान्य है और यह दर्शाता है कि न्यायालय इस प्रकार के दुरुपयोग को गंभीरता से ले रहा है। आगामी सुनवाई में रजिस्ट्री की खामियों को दूर करने और याचिका को सभी प्रक्रियात्मक मानकों के अनुरूप बनाने पर चर्चा होगी।
यह मामला राज्य शासक अधिकारियों के न्यायालय के सामने जवाबदेह ठहराने के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है, इसलिए इसे व्यापक रूप से देखा जा रहा है।