📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gopal Aggarwal
शिक्षा
पंजाब‑हरियाणा हाईकोर्ट में एलपीयू हिंसा पर जनहित याचिका, छात्र ने सीबीआई जांच की मांग
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 30 सित. 2026, 10:36 AM
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फगवाड़ा के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई आज पंजाब‑हरियाणा हाईकोर्ट में होगी, जिसमें एक छात्र ने सीबीआई जांच की मांग की है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में हुई हिंसा से जुड़े जनहित याचिका की सुनवाई निर्धारित की है। यह याचिका एक वर्तमान छात्र द्वारा दायर की गई है, जिसमें अदालत से हस्तक्षेप कर व्यापक जांच का आदेश देने की मांग की गई है।
एलपीयू में पिछले कुछ महीनों में छात्रों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच टकराव हुआ, जिससे संपत्ति को नुकसान और कई लोगों को चोटें आईं। विश्वविद्यालय ने इस घटना को एक अलग‑अलग घटना बताया, परंतु याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही और वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं।
याचिका में छात्र ने विशेष रूप से केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को जांच संभालने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि निष्पक्षता और संसाधनों की उपलब्धता के कारण यह आवश्यक है। साथ ही, विश्वविद्यालय को सुरक्षा सुनिश्चित करने और शैक्षणिक कार्यों को सामान्य करने के निर्देश भी मांगे गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का निर्णय भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा की जांच के मानदंडों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर जब पक्षपात या प्रक्रिया में खामियों का आरोप हो। अदालत आज मौखिक तर्क सुनने के बाद सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है या मामले को राज्य स्तर की जांच एजेंसी को भेज सकती है।
एलपीयू में पिछले कुछ महीनों में छात्रों और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच टकराव हुआ, जिससे संपत्ति को नुकसान और कई लोगों को चोटें आईं। विश्वविद्यालय ने इस घटना को एक अलग‑अलग घटना बताया, परंतु याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही और वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं।
याचिका में छात्र ने विशेष रूप से केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को जांच संभालने की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि निष्पक्षता और संसाधनों की उपलब्धता के कारण यह आवश्यक है। साथ ही, विश्वविद्यालय को सुरक्षा सुनिश्चित करने और शैक्षणिक कार्यों को सामान्य करने के निर्देश भी मांगे गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का निर्णय भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में हिंसा की जांच के मानदंडों को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर जब पक्षपात या प्रक्रिया में खामियों का आरोप हो। अदालत आज मौखिक तर्क सुनने के बाद सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है या मामले को राज्य स्तर की जांच एजेंसी को भेज सकती है।