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16 सित. 2026
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने इस्लामी कानून में प्यूबर्टी को शादी की उम्र घोषित किया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
धर्म

पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने इस्लामी कानून में प्यूबर्टी को शादी की उम्र घोषित किया

✍️ News18 🗓 16 सित. 2026, 04:17 AM 👁 12
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि इस्लामी व्यक्तिगत कानून के तहत प्यूबर्टी पहुँचते ही लड़का या लड़की शादी के लिए स्वतंत्र हो जाता है।

पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई में कहा कि इस्लामी व्यक्तिगत कानून के तहत प्यूबर्टी पहुँचते ही लड़का या लड़की शादी के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र हो जाता है। न्यायालय ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों और फिकह में प्यूबर्टी को शारीरिक परिपक्वता का संकेत माना गया है, जिससे विवाह का अधिकार मिल जाता है।
यह फैसला भारत में विभिन्न समुदायों के लिए वैध शादी की उम्र को लेकर चल रही बहस के बीच आया है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के लिए 18 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 वर्ष की न्यूनतम उम्र निर्धारित है, कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून में प्यूबर्टी पर विवाह की अनुमति है, बशर्ते व्यक्ति अन्यथा सक्षम हो।
क़ानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय व्यक्तिगत कानून को व्यापक कानूनी ढाँचे के साथ सह-अस्तित्व में रहने की पुष्टि करता है, पर साथ ही नाबालिगों को दुरुपयोग से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है। यह रूलिंग नीति निर्माताओं और समुदाय के नेताओं को व्यक्तिगत कानून के प्रावधानों को बाल संरक्षण अधिनियमों के साथ संरेखित करने की चर्चा करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
न्यायालय ने इस निर्णय से तत्काल कोई विधायी परिवर्तन का आदेश नहीं दिया, जिससे आगे की नीति‑निर्माण प्रक्रिया में इस व्याख्या को ध्यान में रखा जाएगा।
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