📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने डीटीसीपी को आवासीय कॉलोनी में निर्माण नियम उल्लंघन पर कार्रवाई की अनुमति दी
✍️ The Times of India
🗓 25 सित. 2026, 03:46 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने दो राज्यों में आवासीय कॉलोनी में निर्माण नियम उल्लंघन पर डीटीसीपी को कार्रवाई करने की मंजूरी दी।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने एक निर्णय दिया है जिससे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशालय (डीटीसीपी) को आवासीय कॉलोनी में निर्माण नियम उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करने में कानूनी बाधाएँ हट गई हैं। यह आदेश उन याचिकाओं के बाद आया था, जिनमें नई विकसित आवासीय परियोजनाओं में ज़ोनिंग, ऊँचाई और सुरक्षा मानकों के व्यापक उल्लंघन को उजागर किया गया था।
इस फैसले के तहत डीटीसीपी को नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने और आवश्यक होने पर अनधिकृत इमारतों को बदलने या ध्वस्त करने का अधिकार प्राप्त है। लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाले डेवलपर और ठेकेदारों के खिलाफ अभियोजन भी शुरू किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नियामक निगरानी को सुदृढ़ करेगा और तेज़ी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में भविष्य के उल्लंघनों को रोक सकता है। डीटीसीपी ने सभी आवासीय कॉलोनी की व्यवस्थित जांच करने और लंबित मामलों को शीघ्रता से निपटाने का संकल्प जताया है, ताकि सुरक्षा और योजना मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
यह निर्णय अन्य राज्यों में समान चुनौतियों का सामना करने वाले न्यायालयों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, क्योंकि वे देखेंगे कि पंजाब‑हरियाणा में लागू की गई प्रवर्तन प्रक्रियाएँ कैसे काम करती हैं।
इस फैसले के तहत डीटीसीपी को नोटिस जारी करने, जुर्माना लगाने और आवश्यक होने पर अनधिकृत इमारतों को बदलने या ध्वस्त करने का अधिकार प्राप्त है। लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाले डेवलपर और ठेकेदारों के खिलाफ अभियोजन भी शुरू किया जा सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नियामक निगरानी को सुदृढ़ करेगा और तेज़ी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में भविष्य के उल्लंघनों को रोक सकता है। डीटीसीपी ने सभी आवासीय कॉलोनी की व्यवस्थित जांच करने और लंबित मामलों को शीघ्रता से निपटाने का संकल्प जताया है, ताकि सुरक्षा और योजना मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके।
यह निर्णय अन्य राज्यों में समान चुनौतियों का सामना करने वाले न्यायालयों के लिए एक उदाहरण बन सकता है, क्योंकि वे देखेंगे कि पंजाब‑हरियाणा में लागू की गई प्रवर्तन प्रक्रियाएँ कैसे काम करती हैं।